बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: पवन सिंह और निशांत कुमार सहित NDA के 8 दिग्गजों का नामांकन, जानिए शाहबाद से पटना तक का पूरा सियासी समीकरण

पटना, बिहारस्केन न्यूज डेस्क। बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकरबिहार की सियासत में तपती गर्मी के बीच राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर पटना विधानसभा परिसर में सोमवार को भारी गहमागहमी देखने को मिली। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी 8 उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मौजूदगी में अपने-अपने पर्चे दाखिल कर दिए हैं।

इस नामांकन में सबसे ज्यादा ध्यान भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह और राज्य सरकार के मंत्री निशांत कुमार पर रहा, जिन्हें देखने के लिए विधानसभा परिसर के बाहर भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में NDA उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान पवन सिंह, निशांत कुमार, अशरफ अंसारी और अन्य नेताओं की राजनीतिक ग्राफिक तस्वीर
बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए NDA के उम्मीदवारों ने पटना विधानसभा परिसर में नामांकन दाखिल किया। इस चुनाव में पवन सिंह, निशांत कुमार, अशरफ अंसारी और अन्य नेताओं के जरिए सियासी समीकरण बदलने की चर्चा तेज है (AI Generated)।

शाहबाद की डैमेज कंट्रोल नीति और जमीनी कार्यकर्ताओं पर भरोसा

बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 महज एक सदन की सदस्यता का चुनाव नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बिछाई जा रही सोशल इंजीनियरिंग की बिसात है। बीजेपी ने इस बार भोजपुरी स्टार पवन सिंह को उच्च सदन भेजकर एक बड़ा दांव खेला है।

पर्दे के पीछे की कहानी: याद दिला दें कि पिछले आम चुनावों में पवन सिंह ने काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर एनडीए के समीकरण बिगाड़ दिए थे, जिसका सीधा नुकसान गठबंधन को शाहबाद क्षेत्र में उठाना पड़ा था। अब बीजेपी ने उन्हें मुख्यधारा में वापस लाकर सवर्ण और युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

इसके साथ ही एनडीए ने इस बार जमीनी कार्यकर्ताओं को भी तवज्जो दी है। बीजेपी की तरफ से अनिल ठाकुर और शीला पंडित जैसे जमीनी स्तर के नेताओं को टिकट देकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी अपने कैडर को नहीं भूलती। वहीं, संजय मयूख लगातार तीसरी बार उच्च सदन जाने की तैयारी में हैं।

चिराग और जदयू का अपना दांव

जनता दल यूनाइटेड (JDU) की तरफ से राज्य के कद्दावर मंत्री निशांत कुमार ने अपना पर्चा भरा, हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने निजी कार्यक्रमों के चलते इस दौरान मौजूद नहीं रह सके। वहीं दूसरी तरफ, लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी अशरफ अंसारी को मैदान में उतारकर स्वर्गीय राम विलास पासवान के उस पुराने नारे को मजबूत करने की कोशिश की है, जिसमें वे अक्सर समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की बात करते थे।

दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से सुनील कुमार सिंह ने लगातार तीसरी बार परिषद पहुंचने के लिए विपक्ष के अकेले चेहरे के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया है।

एक नजर में समझें पूरा चुनावी गणित

टों के इस समीकरण को और करीब से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

पार्टी / गठबंधनप्रमुख उम्मीदवारमुख्य राजनीतिक क्षेत्र / प्रभावराजनीतिक मायने
बीजेपी (NDA)पवन सिंहशाहबाद / युवा-सवर्ण वर्गकाराकाट विवाद के बाद डैमेज कंट्रोल
बीजेपी (NDA)संजय मयूखसंगठन / मीडियातीसरी बार लगातार भरोसा
जदयू (NDA)निशांत कुमार (मंत्री)नीतीश कुमार के कोर वोटरसरकार और संगठन में संतुलन
लोजपा-आर (NDA)अशरफ अंसारीअल्पसंख्यक समाजचिराग पासवान का सोशल इंजीनियरिंग दांव
आरजेडी (विपक्ष)सुनील कुमार सिंहलालू प्रसाद के करीबीविपक्ष की ओर से मजबूत सवर्ण चेहरा

आगे क्या होगा?

बिहार विधान परिषद की 75 सदस्यीय विधानसभा में इस समय 9 सीटों पर लड़ाई दिलचस्प हो चुकी है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक:

  • नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख: 11 जून, 2026
  • मतदान की तारीख (यदि आवश्यक हुआ): 18 जून, 2026

राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि संख्या बल के हिसाब से सभी 9 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। लेकिन इस चुनाव ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में गठबंधन चाहे जो भी हो, नजरें हमेशा आने वाले बड़े सियासी दंगल (विधानसभा चुनाव) पर ही टिकी होती हैं।

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