पटना / वाल्मीकिनगर: पड़ोसी देश नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिलों में कुदरत ने भयानक कहर बरपाया है। हर तरफ सिर्फ तबाही और खौफ का मंज़र है। तिब्बत सीमा के पास भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ (Nepal Flash Flood )ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि देखते ही देखते कई बस्तियां, सड़कें और पुल काल के गाल में समा गए। इस भयानक त्रासदी में अब तक 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1500 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
सबसे ज्यादा दिल दहलाने वाली बात यह है कि इस खौफनाक मंज़र के बीच 288 भारतीय नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर वो श्रद्धालु हैं, जो आस्था और विश्वास के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, तबाह हुए इलाकों से विदेशी पर्यटकों समेत सैकड़ों लोगों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है। 42 किलोमीटर लंबी सड़क पानी में बह जाने और कम्युनिकेशन नेटवर्क पूरी तरह ठप होने के कारण हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। अपनों की खैरियत जानने के लिए परिवार वाले परेशान हैं।
कैसे चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन?
त्रासदी की खबर मिलते ही भारत और नेपाल, दोनों देशों की सरकारें अलर्ट हो गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है। भारतीय दूतावास ने लापता भारतीयों की जानकारी जुटाने और परिवारों की मदद के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर (+977 985 131 6807 और +977 970 910 7500) जारी किए हैं।
नेपाल की सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ग्राउंड ज़ीरो पर दिन-रात एक कर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। लेकिन दुर्गम इलाका, टूटे हुए पुल और खराब मौसम हर कदम पर बाधा बन रहे हैं। इसीलिए अब हेलीकॉप्टरों की मदद से पहाड़ों में फंसे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। भारत ने भी दरियादिली दिखाते हुए राहत सामग्री के साथ अपने दो सैन्य विमान नेपाल भेजे हैं, ताकि प्रभावितों तक जल्द से जल्द मेडिकल और ज़रूरी मदद पहुंचाई जा सके।
नेपाल (Nepal Flash Flood) की तबाही, बिहार की धड़कनें तेज़: आखिर क्यों?
आप सोच रहे होंगे कि तबाही नेपाल के पहाड़ों में आई है, तो बिहार की सांसें क्यों अटकी हुई हैं? इसका सीधा सा जवाब है – दोनों देशों का भौगोलिक जुड़ाव और नदियों का गहरा जाल।
नेपाल की भोटे कोशी नदी का उफनता पानी सीधे त्रिशूली नदी में मिलता है, और यही त्रिशूली नदी नेपाल से होते हुए जब भारत की सीमा में प्रवेश करती है, तो इसे हम ‘गंडक नदी’ (या नारायणी) के नाम से जानते हैं। यानी नेपाल के पहाड़ों से जो लाखों क्यूसेक पानी का भारी सैलाब त्रिशूली नदी में उतरा है, वह गंडक नदी के रास्ते सीधे बिहार के मैदानी इलाकों में पूरी रफ़्तार से प्रवेश करेगा।
इस बड़े खतरे यानी Nepal Flash Flood Impact on Bihar को भांपते हुए बिहार सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।
वाल्मीकिनगर बराज के सभी 36 गेट खुले
गंडक नदी का प्रवेश द्वार, यानी पश्चिमी चंपारण का वाल्मीकिनगर बराज इस वक्त फोकस में है। नेपाल से आ रहे पानी के भारी दबाव और तेज़ बहाव को देखते हुए, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, बराज से पानी का डिस्चार्ज बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। सुबह जो आंकड़ा लगभग 86,000 क्यूसेक था, वो शाम तक बढ़कर 1.44 लाख क्यूसेक को पार कर गया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों का अनुमान है कि जल्द ही यह बहाव 3 लाख क्यूसेक तक भी पहुंच सकता है। गंडक नहर में पानी की सप्लाई फिलहाल रोक दी गई है ताकि मुख्य नदी से पानी आसानी से निकल सके और नहर के आस-पास के गांवों को डूबने से बचाया जा सके।
बिहार के 6 जिलों में हाई अलर्ट, क्या हैं तैयारियां?
नेपाल से आ रहे इस जलजले के कारण Nepal Flash Flood Impact on Bihar की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। गंडक बेसिन के आस-पास पड़ने वाले 6 मुख्य जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। ये 6 संवेदनशील जिले हैं:
- पश्चिमी चंपारण
- पूर्वी चंपारण
- गोपालगंज
- सारण
- मुज़फ़्फ़रपुर
- वैशाली
इन जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को सख्त निर्देश हैं कि संवेदनशील और नदी किनारे बसे निचले इलाकों में रह रहे लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं। पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज में बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने का काम शुरू भी हो चुका है।
क्या हैं सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम?
अचानक आई इस ‘फ्लैश फ्लड’ की प्रकृति बहुत आक्रामक होती है। Nepal Flash Flood Impact on Bihar को कम करने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने युद्धस्तर पर त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है:
- NDRF और SDRF की तैनाती: गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण के अति-संवेदनशील इलाकों में NDRF और SDRF की टीमों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है।
- SSB की चौकसी: भारत-नेपाल सीमा पर गश्त करने वाले SSB जवानों की 11 रेस्क्यू टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि सीमावर्ती इलाकों में पानी घुसने पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।
- तटबंधों की 24×7 निगरानी: गंडक नदी के दोनों ओर बने तटबंधों (Embankments) की सुरक्षा के लिए इंजीनियरों की टीमें रात की विशेष पेट्रोलिंग कर रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पानी के भारी दबाव से कोई भी बांध या तटबंध कमज़ोर न पड़े।
आगे क्या?
राहत की बात यह है कि फिलहाल बिहार के किसी भी जिले में बाढ़ से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन अगले 24 से 48 घंटे राज्य के लिए बेहद क्रिटिकल माने जा रहे हैं। गंडक नदी का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है।
BiharScan की आप सभी पाठकों से अपील है कि घबराएं नहीं, अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। नेपाल में फंसे हमारे 288 भारतीय भाई-बहनों और श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा है। बाढ़ और रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी पल-पल की सबसे सटीक और तेज़ जानकारी के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।
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