मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में उन्हें बड़ा झटका देते हुए पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनंत सिंह को सख्त निर्देश दिया है कि वे 4 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले जांच अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करें।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमानत देते वक्त अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या और उनकी गंभीरता पर ठीक से विचार नहीं किया गया था। अदालत ने यह भी पूछा कि उनके पुराने मामलों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर कैसे देखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारी को चार महीने के भीतर जांच पूरी कर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।
क्या था दुलारचंद यादव हत्याकांड?
यह पूरा मामला 30 अक्टूबर 2025 का है, जब बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में चुनावी हिंसा भड़क उठी थी। जनसुराज के उम्मीदवार के चुनाव प्रचार के दौरान राजद नेता दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। उस दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे, जिसके बाद हुई हिंसक झड़प में दुलारचंद की जान चली गई थी। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह ने चुनाव में जीत हासिल की थी और मार्च 2026 में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
वकीलों के मुताबिक, अनंत सिंह के खिलाफ हत्या और अपहरण जैसे गंभीर मामलों सहित कुल 67 केस दर्ज हैं। उनकी बेटी की शादी को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए यह समय दिया है।
राजनीतिक और पारिवारिक मोर्चे पर भी बढ़ीं मुसीबतें
कानूनी शिकंजे के साथ-साथ अनंत सिंह के लिए राजनीति में भी जमीन खिसकती नजर आ रही है:
- जेडीयू से निष्कासन: पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते 24 अक्टूबर को जनता दल (यूनाइटेड) ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है। विधानसभा सचिवालय ने भी उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- सरकारी आवास खाली करने का आदेश: पार्टी से निष्कासन के बाद भवन निर्माण विभाग ने नीलम देवी को पटना स्थित सरकारी आवास (1, मॉल रोड) को 25 नवंबर 2026 तक खाली करने का निर्देश दिया है और उनसे राज्य मंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया गया है।
एक तरफ जहां अनंत सिंह अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ अदालती आदेश और राजनीतिक झटकों ने उनकी मुश्किलें दोगुना कर दी हैं।