समस्तीपुर के विमेंस कॉलेज में गुरुवार को भोजपुरी और मैथिली की सुरों की मल्लिका, पद्मविभूषण से सम्मानित ‘बिहार कोकिला’ डॉ. शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि बेहद श्रद्धा के साथ मनाई गई। कॉलेज परिसर में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता प्रभारी प्रधानाचार्य प्रोफेसर राजेश कुमार रंजन ने की, जहां शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नम आंखों से याद किया।
लोक जीवन से जुड़ी थीं शारदा सिन्हा की आवाज
श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत करते हुए प्रभारी प्रधानाचार्य प्रोफेसर राजेश कुमार रंजन ने कहा कि डॉ. शारदा सिन्हा की गायिकी सीधे तौर पर आम जनजीवन और संस्कृति से जुड़ी हुई थी। उनका जाना भोजपुरी और मैथिली संगीत जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. सुरेश साह ने भी उनके सादगी भरे जीवन और कला के प्रति समर्पण पर विस्तार से रोशनी डाली।
संगीत विभाग की अध्यक्ष डॉ. ऋचा वर्मा ने इस खास मौके पर उनके गाए प्रसिद्ध लोकगीतों को गुनगुनाकर उन्हें अनोखी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज भी बिहार के शादी-ब्याह और हर घर के मांगलिक अवसरों पर डॉ. शारदा सिन्हा के गीत न बजे तो उत्सव अधूरा सा लगता है। खासकर छठ महापर्व के दौरान उनके गाए हुए गीत हर घाट की पहचान बन चुके हैं, जिनके बिना छठ पर्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से थीं अलंकृत
संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सरकार ने उन्हें देश के बड़े-बड़े सम्मानों से नवाजा था:
- वर्ष 1991: पद्मश्री
- वर्ष 2000: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- वर्ष 2018: पद्मभूषण
- वर्ष 2025: मरणोपरांत देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मविभूषण’
इस दौरान कॉलेज के तमाम शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने उनके सुरों को अमर बताते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।