पटना: बिहार में घोटालों का इतिहास तो पुराना है, लेकिन इस बार जो हुआ है उसने सरकार से लेकर पुलिस महकमे तक के होश उड़ा दिए हैं। जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार बालू घोटाला 2026 की यह कोई कागजों की हेराफेरी वाला पुराना खेल नहीं है, बल्कि सीधे सरकार के डिजिटल तिजोरी में ही डाका डाल दिया गया है। बिहार के खनन विभाग के डिजिटल पोर्टल को हैक कर ₹350 करोड़ से ज्यादा के ‘अवैध बालू खेल’ का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है।
इस महाघोटाले की गूंज बिहार के 17 जिलों में सुनाई दे रही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की तफ्तीश में जो बात सामने आई है, उसने सबको चौंका दिया है— सरकारी सिस्टम को सुरक्षित रखने वाले NIC (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) के कुछ कर्मियों और 100 से ज्यादा बड़े बालू माफियाओं ने मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया है।
चोरी का हाईटेक तरीका (बिहार बालू घोटाला): न ओटीपी आया, न भनक लगी!
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन जालसाजों ने डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए ऐसा शातिराना तरीका अपनाया जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे:

- सुरक्षा की दीवार (OTP) को किया गायब: डिजिटल पोर्टल पर जो भी काम होता है, उसकी सुरक्षा के लिए मोबाइल पर ओटीपी (OTP) आता है। लेकिन विभाग के ही कुछ बिकाऊ कर्मियों की मदद से इस ओटीपी सिस्टम को पूरी तरह बाईपास (बंद) कर दिया गया।
- फर्जी कागजातों का खेल: जैसे ही सुरक्षा का यह घेरा हटा, 100 से ज्यादा लाइसेंसधारी कारोबारियों ने जिला खनन दफ्तर की मंजूरी के बिना ही पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर दिए।
- सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ और अंधाधुंध कमाई: इन जालसाजों ने डेटाबेस सर्वर और मुख्य सॉफ्टवेयर में ही बदलाव कर दिया। इसके बाद बालू उठाने की तय सीमा को फर्जी तरीके से बढ़ा दिया गया और धड़ल्ले से नकली ई-चालान जारी कर करोड़ों का बालू बाजार में बेच दिया गया।
17 जिलों में हड़कंप, 100 से ज्यादा कारोबारी रडार पर
इस डिजिटल डकैती (बिहार बालू घोटाला) का पहला सुराग अक्टूबर 2025 में मिला था, जब पटना के साइबर थाने में पहली एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी। ईओयू (EOU) की सुई जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परतें खुलती गईं:
अब तक की बड़ी कार्रवाई: राज्य के 17 जिलों में अब तक कुल 62 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। 100 से ज्यादा बड़े बालू कारोबारी और कई सरकारी कर्मचारी सीधे पुलिस के रडार पर हैं।
आगे क्या होगा? ईओयू की स्पेशल टीम अब इस तकनीकी सेंधमारी के एक-एक तार को जोड़ रही है। सूत्रों की मानें तो इस जांच की आंच जल्द ही विभाग के कई बड़े साहबों (अधिकारियों) और सफेदपोश नेताओं तक पहुंचने वाली है। धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट के तहत शिकंजा कसना शुरू हो चुका है, जिससे आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में और बड़ा भूचाल आना तय है।