West Bengal Madrasa Survey 2026: सत्ता बदलते ही शुभेंदु सरकार का बड़ा एक्शन, खंगाली जाएगी एक-एक ‘खारेजी’ की कुंडली

कोलकाता/पटना (बिहारस्कैन डेस्क)। West Bengal Madrasa Survey 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में दशकों पुराना समीकरण बदलने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसलों का दौर शुरू हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लंबे शासन का अंत कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने राज्य के सबसे संवेदनशील मोर्चे पर सीधा हाथ डाला है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी मदरसों का एक व्यापक, अनिवार्य और समयबद्ध राज्यव्यापी सर्वे (West Bengal Madrasa Survey 2026) कराने का ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिया है।

इस हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक आदेश के आते ही राज्य के सियासी और सामाजिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। अल्पसंख्यक कार्य विभाग ने साफ निर्देश जारी किया है कि जिलाधिकारियों (DMs) को अपने-अपने क्षेत्रों के ब्लॉक और नगर पालिका स्तर पर चल रहे एक-एक मदरसे का पूरा ब्योरा जुटाना होगा। इस डेटा को कंपाइल कर तय समय सीमा के भीतर सीधे राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ को सबमिट करने को कहा गया है।

West Bengal Madrasa Survey 2026 के रडार पर ‘खारेजी’ मदरसे, इन 4 बिंदुओं पर टिकेगी जांच

बिहारस्कैन को मिली विशेष जानकारी के अनुसार, इस सर्वे का मुख्य निशाना वे मदरसे हैं जो सरकारी सहायता प्रणाली से बाहर हैं। बंगाल में सरकारी मान्यता प्राप्त (Aided and Unaided) मदरसों का रिकॉर्ड तो बोर्ड के पास है, लेकिन हजारों की संख्या में चल रहे गैर-मान्यता प्राप्त यानी ‘खारेजी’ (Khareji) मदरसों का कोई केंद्रीय डेटाबेस नहीं है। प्रशासन मुख्य रूप से इन चार अहम बिंदुओं पर जानकारी जुटा रहा है:

  • वैधता और स्थापना: मदरसा किस वर्ष स्थापित हुआ और क्या इसके पास संचालन या जमीन से जुड़े वैध कानूनी दस्तावेज हैं?
  • छात्र-शिक्षक अनुपात: मदरसे में वर्तमान में कुल कितने छात्र नामांकित हैं और उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
  • फंडिंग का मुख्य स्रोत: संस्था के वित्तीय खर्चे कैसे पूरे हो रहे हैं? क्या इन्हें केवल स्थानीय चंदे (जकात/इमदाद) से चलाया जा रहा है या कोई बाहरी या विदेशी फंडिंग शामिल है?
  • आवासीय ढांचा (Hostel Property): मदरसों में कितने छात्र हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं और वहां सुरक्षा व स्वच्छता के क्या इंतजाम हैं?

सरकार का पक्ष है कि यह पूरी कवायद केवल एक पारदर्शी डेटाबेस तैयार करने के लिए है ताकि शैक्षणिक नीतियों को सुधारा जा सके। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे मदरसों पर कड़े प्रशासनिक नियंत्रण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

‘हाई मदरसा’ और ‘सीनियर मदरसा’ का पेच भी आएगा सामने

बंगाल के मदरसा ढांचे को समझना बिहार या उत्तर प्रदेश के मुकाबले थोड़ा अलग है। पश्चिम बंगाल देश का पहला ऐसा राज्य था जिसने मदरसों को वैधानिक मान्यता देकर ‘पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा बोर्ड’ (WBBME) के तहत आधुनिक प्रणाली से जोड़ा था। यहाँ दो मुख्य प्रणालियाँ सक्रिय हैं:

  1. हाई मदरसा व्यवस्था (Mainstream System): इसमें 90% सिलेबस सामान्य सरकारी स्कूलों (माध्यमिक बोर्ड) जैसा ही होता है। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और इतिहास के साथ छात्र केवल बुनियादी अरबी पढ़ते हैं। इस आधुनिक दृष्टिकोण के कारण यहाँ हिंदू छात्र भी पढ़ते हैं।
  2. सीनियर मदरसा व्यवस्था (Theological System): यह पूरी तरह इस्लामिक धर्मशास्त्र (Theology) पर आधारित है। इसमें कक्षा 10 को ‘आलिम’ और 12वीं को ‘फाजिल’ कहा जाता है, जिसके बाद ‘कामिल’ (Syllabus Degree) और ‘एम.एम.’ (Postgraduate) की पढ़ाई होती है।
West Bengal Madrasa Survey 2026
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य के सभी मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के व्यापक सर्वेक्षण के आदेश के बाद प्रशासनिक तैयारियां तेज।

फिलहाल राहत, लेकिन भविष्य में कड़े एक्शन के संकेत

धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा इस सर्वे पर चिंता जताए जाने के बीच सरकार ने फिलहाल बीच का रास्ता निकाला है। आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान किसी भी संस्था के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई, तालाबंदी या छात्रों की बेदखली नहीं की जाएगी। मदरसे अपनी दैनिक गतिविधियों को सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं।

लेकिन सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि यह केवल पहली सीढ़ी है। सर्वे की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद, जिन गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के वित्तीय स्रोत संदिग्ध पाए जाएंगे या जहां का इंफ्रास्ट्रक्चर तय मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उनके खिलाफ सरकार कड़े कानूनी और विनियामक कदम उठा सकती है। नई सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे इन बड़े बदलावों पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

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