बिहार के गांवों में अब नहीं होगी पानी की किल्लत! जलमीनारों पर लगेंगे 20KW के सोलर पैनल, मुखिया-विधायक को मिलेगी बिजली की पल-पल की रिपोर्ट

बिहार के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने पूरी तरह कमर कस ली है। गांवों में बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायती राज विभाग ने कई बड़े और क्रांतिकारी फैसले लिए हैं। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार ने साफ कर दिया है कि अब ग्रामीण विकास के कामों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आइए जानते हैं सरकार के इन नए फैसलों से बिहार के गांवों में क्या-क्या बदलने वाला है।

जलमीनारों की सोलर क्षमता में चार गुना छलांग

ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति को निर्बाध रखने के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब तक जलमीनारों पर 5 किलोवाट (5 KW) के सोलर पैनल लगाने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर सीधे 20 किलोवाट (20 KW) कर दिया गया है।

इस बदलाव से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिजली गुल होने या वोल्टेज की समस्या आने पर भी गांवों में पानी की सप्लाई बाधित नहीं होगी। गांवों के हर घर तक सुचारू रूप से पानी पहुंच सके, इसके लिए यह कदम एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

पंचायत भवन निर्माण और रखरखाव अब ठेकेदारों की सीधी जवाबदेही

बिहार में तेजी से बन रहे पंचायत सरकार भवनों के काम को रफ्तार देने के साथ-साथ इनके रखरखाव पर भी विशेष फोकस किया गया है। सरकार ने यह कड़ा निर्देश दिया है कि जो ठेकेदार (संवेदक) इन भवनों का निर्माण करेंगे, उन्हें ही इसके मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी।

  • तय होगी जवाबदेही: संवेदकों की लायबिलिटी पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है ताकि भवनों की देखरेख में लापरवाही न हो।
  • बिल्ट-इन सोलराइजेशन: अब पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के एस्टीमेट में ही सोलराइजेशन के काम को जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए 15वें वित्त आयोग और सप्तम राज्य वित्त आयोग के फंड से राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

अब जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचेगी बिजली आपूर्ति की रिपोर्ट

विकास योजनाओं में पारदर्शिता लाने और जनप्रतिनिधियों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक अनोखी और अनूठी पहल की है। अब गांवों में बिजली आपूर्ति की असल स्थिति क्या है, इसकी नियमित जानकारी सीधे जनप्रतिनिधियों को दी जाएगी।

इसके लिए एक डेडिकेटेड टीम बनाई जाएगी जो मुखिया, विधायक और सांसद जैसे सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर पर यह सूचना भेजेगी कि उनके क्षेत्र की हर पंचायत में हर दिन कितने घंटे बिजली मिल रही है। इससे जमीनी स्तर पर निगरानी और मजबूत होगी।

बिहार सरकार के इन ताबड़तोड़ फैसलों से यह साफ है कि अब सूबे के गांवों को आत्मनिर्भर और स्मार्ट बनाने का सपना तेजी से जमीन पर उतर रहा है।

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