बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर शिक्षा विभाग के फैसलों ने हलचल मचा दी है। विभाग की कमान संभालते ही अपर मुख्य सचिव सीके अनिल (CK Anil) ने फुल एक्शन मोड में आते हुए एक साथ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। विभाग ने राज्य के 10 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और 9 जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) का रातों-रात ट्रांसफर कर दिया है। इस बड़े बदलाव से पटना से लेकर सीवान, भागलपुर, नवादा और पूर्वी चंपारण तक प्रशासनिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
आइए जानते हैं कि इस फेरबदल के पीछे की मुख्य वजह क्या है और किसे कौन सी नई जिम्मेदारी मिली है।
इन बड़े जिलों के बदले गए DEO, जानें किसे कहां मिली कमान
शिक्षा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं:
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सरस्वती कुमारी को पटना का नया जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) नियुक्त किया गया है।
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अब तक पटना के DEO रहे योगेश कुमार को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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पूर्वी चंपारण के राजन कुमार गिरी और नवादा के दीपक कुमार को भी बिहार बोर्ड से अटैच किया गया है।
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सीवान के DEO राघवेंद्र प्रताप सिंह को मुख्यालय के योजना और अनुश्रवण कोषांग में सहायक निदेशक बनाया गया है, जबकि उनकी जगह सीतामढ़ी के राघवेंद्र मणि त्रिपाठी को सीवान की कमान मिली है।
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बिहार बोर्ड के उप सचिव मुकेश कुमार अब भागलपुर के नए DEO होंगे। इसके अलावा दिनेश कुमार पासवान को सीतामढ़ी, प्रफुल्ल कुमार मिश्रा को पूर्वी चंपारण और सुभाष कुमार को नवादा का DEO बनाया गया है।
9 DPO के भी बदले गए ठिकाने
DEO के साथ-साथ शिक्षा विभाग ने राज्यभर में 9 DPO (जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों) का भी तबादला कर दिया है:
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विनय कुमार सुमन को खगड़िया, आनंद कुमार को मुंगेर, विकास कुमार डीएन को औरंगाबाद, तारिक सज्जाद को मधेपुरा और रजनीश कुमार साहू को भागलपुर भेजा गया है।
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भोला कुमार कर्ण को गोपालगंज और कुमार अभिजीत को पूर्वी चंपारण की जिम्मेदारी दी गई है।
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इसके अलावा SCERT के सहायक निदेशक राजीव कुमार और रवि कुमार को बक्सर का नया DPO नियुक्त किया गया है।
तबादलों के पीछे की असली वजह: 34 करोड़ की अवैध निकासी का खेल!
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के पीछे हाल ही में सामने आया एक बड़ा वित्तीय घोटाला है। शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान के नाम पर कुल 34 करोड़ 11 लाख 56 हजार 604 रुपये की अवैध निकासी का मामला उजागर हुआ था।
बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह बड़ा खेल पकड़ में आया, जिसके बाद हड़कंप मच गया। हालांकि, विभाग की सख्ती के बाद अब तक करीब 29 करोड़ रुपये वापस भी कराए जा चुके हैं, लेकिन इस खुलासे के बाद प्रशासनिक अमले पर गाज गिरनी तय मानी जा रही थी, जो अब तबादलों के रूप में सामने आई है।