दीपावली पर रेलवे का बड़ा फेलियर: 35 घंटे तक लेट हुईं फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें, स्टेशनों पर बिलखते रहे यात्री

पटना/बिहार:

रोशनी और खुशियों के महापर्व दीपावली पर अपनों के बीच पहुंचकर त्योहार मनाने का सपना संजोए बैठे हजारों यात्रियों के लिए इस बार का सफर किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। रेलवे प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा के दावे तो बड़े-बड़े किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आई। त्योहार के मद्देनजर चलाई गई स्पेशल ट्रेनें समय पर चलने के बजाय कई-कई घंटे विलंब से अपने गंतव्य तक पहुंचीं, जिससे यात्रियों का पूरा शेड्यूल और त्योहार का उत्साह पूरी तरह बेपटरी हो गया।

35 घंटे तक लेट हुईं ट्रेनें, दावों की खुली पोल

रेलवे की ओर से अतिरिक्त फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें तो पटरी पर उतार दी गईं, लेकिन लचर परिचालन व्यवस्था (Poor Operational Management) के चलते ये ट्रेनें राहत देने के बजाय यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गईं। आलम यह रहा कि कई ट्रेनें 5 घंटे से लेकर पूरे 35 घंटे तक की भारी देरी से चल रही थीं।

मिसाल के तौर पर, उधना-मधुबनी स्पेशल ट्रेन (09035) लगभग 35 घंटे 15 मिनट की भारी देरी से चली, वहीं सीएसएमटी से मुजफ्फरपुर आने वाली ट्रेन (01081) करीब 14 घंटे 47 मिनट विलंबित रही। इसके अलावा, आनंद विहार से पटना और बिहार के अन्य रूटों पर आने वाली महत्वपूर्ण गाड़ियां भी 3 से 11 घंटे तक की देरी से स्टेशनों पर पहुंचीं। ट्रेनें कब आएंगी, इसका कोई अता-पता नहीं था।

स्टेशनों पर कटी रात, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसे लोग

ट्रेनों के समय पर न आने और बार-बार उनके आगमन का समय बदलने के कारण यात्रियों को घंटों रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर ही रात गुजारनी पड़ी। पटना जंक्शन समेत राज्य के अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां बैठने तक की जगह नहीं मिल रही थी।

बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों का बुरा हाल था। उन्हें पीने के पानी, खानपान और साफ-सुथरे शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। कई यात्रियों की छुट्टियां सीमित थीं, ऐसे में ट्रेनें लेट होने के कारण उनकी आगे की योजनाएं और दीपावली की खुशियां पूरी तरह फीकी पड़ गई0ं।

यात्रियों का फूटा गुस्सा, उठाई सख्त मांग

परेशान और हताश यात्रियों का कहना है कि सिर्फ कागजों पर स्पेशल ट्रेनों की संख्या गिना देना और आंकड़ों की खानापूर्ति करना काफी नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध (Punctual) परिचालन सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।

यात्रियों ने पुरजोर मांग की है कि रेलवे को ट्रेनों के आने-जाने की सटीक जानकारी समय पर देनी चाहिए। साथ ही, स्टेशनों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और यात्रियों के लिए पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी पर्व-त्योहार के दौरान यात्रियों को इस तरह की दुविधा और मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top