बिहार के सरकारी स्कूलों में अब दिखेगा ‘गुरुकुल’ का जलवा, ‘रट्टा मार’ पढ़ाई का ‘द एंड’; शिक्षा विभाग का मेगा प्लान

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ इतिहास और आधुनिकता का बेहद खूबसूरत मिलन होने जा रहा है। अगर आपका बच्चा भी बिहार के सरकारी स्कूल में पढ़ता है, तो भारी-भरकम बस्ते और ‘रट्टा मार’ पढ़ाई के तनाव को भूल जाइए। राज्य के स्कूलों में अब प्राचीन भारतीय गुरुकुल पद्धति और आधुनिक ‘रूम टू रीड’ (Room to Read) मॉडल के तालमेल से बच्चों को पढ़ाया जाएगा।

शिक्षा विभाग की इस अनूठी पहल का सीधा मकसद बच्चों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय उनका मानसिक और शारीरिक विकास करना है

पहले चरण में 50 स्कूलों का चयन, शिक्षकों को मिली स्पेशल ट्रेनिंग

इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने पहले फेज में बिहार के सरकारी स्कूलों में से 50 स्कूलों को शॉर्टलिस्ट किया है। अधिकारियों का कहना है कि अगर यह शुरुआती प्रयोग उम्मीद के मुताबिक सफल रहा, तो इसे बिहार के सभी प्राथमिक और मध्य स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू कर दिया जाएगा।

बड़ी बात: इस नई व्यवस्था को क्लासरूम में लागू करने के लिए एनसीईआरटी (NCERT) के जरिए चुने गए स्कूलों के शिक्षकों को खास ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।

क्लासरूम का बदलेगा मिजाज: ‘बोलती दीवारें’ और सामूहिक सुर

अब स्कूल की क्लासरूम सिर्फ चार दीवारें नहीं होंगी, बल्कि खुद एक किताब की तरह नजर आएंगी।

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब आधुनिक और पारंपरिक तरीकों के मेल से होगी बच्चों की पढ़ाई।
बिहार के सरकारी स्कूलों में अब आधुनिक और पारंपरिक तरीकों के मेल से होगी बच्चों की पढ़ाई (सांकेतिक तस्वीर)।
  • बोलती दीवारें: क्लासरूम की दीवारों और ब्लैकबोर्ड को इस तरह सजाया जाएगा कि उन पर ज्ञानवर्धक वाक्य, सूत्र (Formulas) और प्रेरक विचार लिखे होंगे। बच्चे क्लास में घुसते ही खेलते-कूदते बहुत कुछ सीख जाएंगे।
  • मिटेगा स्टेज फियर: गुरुकुल की तर्ज पर अब क्लास में टीचर जो बोलेंगे, बच्चे उसे एक सुर में दोहराएंगे। बच्चों की झिझक और स्टेज का डर खत्म करने के लिए उन्हें बारी-बारी से ब्लैकबोर्ड के पास बुलाकर तेज और साफ आवाज में पाठ पढ़वाया जाएगा। कठिन शब्दों को बोर्ड पर अंडरलाइन करके उनका मतलब रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाया जाएगा।

गणित-अंग्रेजी का डर होगा छूमंतर, बनी स्पेशल रणनीति

अक्सर बच्चे गणित, अंग्रेजी और हिंदी को सबसे कठिन मानते हैं। इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक खास रणनीति तैयार की है:

विषयपढ़ाने का नया और आसान तरीका
शुद्ध हिंदीग्रामीण परिवेश के बच्चों की भाषाई झिझक दूर करने के लिए सही उच्चारण पर बार-बार जोर दिया जाएगा।
विजुअल अंग्रेजीअंग्रेजी को रटाने के बजाय चित्रों और प्रतीकों (Visuals) के जरिए सिखाया जाएगा। शुरुआत में हिंदी में अर्थ समझाया जाएगा, फिर धीरे-धीरे व्यावहारिक अंग्रेजी पर शिफ्ट किया जाएगा।
दैनिक जीवन से गणितगणित के उबाऊ फॉर्मूलों को रटने के बजाय पैसों के लेन-देन (बाजार के ज्ञान), खाने की चीजों और क्लास में मौजूद बच्चों की लाइव संख्या से जोड़ा जाएगा।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, खेल और कला में भी नंबर-1 बनेंगे बच्चे

इस नए मॉडल के तहत बच्चों के भीतर छिपे हुनर को भी तराशा जाएगा। अब सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर बच्चे अपनी पसंद के हिसाब से संगीत, गायन, वादन, चित्रकला और नृत्य (Dance) की बाकायदा शिक्षा लेंगे।

इसके अलावा, बच्चों को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए स्कूल के खेलकूद कैलेंडर को भी अपग्रेड किया जा रहा है। अब स्कूलों में दौड़, बाधा दौड़, ऊंची कूद और लंबी कूद जैसे पारंपरिक मैदानी खेल भी सिखाए जाएंगे।

निश्चित रूप से, बिहार सरकार का यह कदम सरकारी स्कूल के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों के सामने सीना तानकर खड़े होने का हौसला देगा।

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