Yogasana: दादा-दादी से लेकर पोते-पोतियों तक

बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए कौन सा योगासन (Yogasana) है सबसे बेस्ट? जानिए ‘पूरे परिवार का योग’ गाइड

पटना/नई दिल्ली (बिहारस्कैन विशेष डेस्क)। “पूरे परिवार का योग।” आज के इस डिजिटल और सुपरफास्ट दौर में हमारी सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद पूरा परिवार अलग-अलग कोनों में सिमटा हुआ है। बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर गेम खेलने या रील्स देखने में व्यस्त हैं, गृहिणियां रसोई और घर के अंतहीन कामों में खुद को थका रही हैं, और घर के बुजुर्ग (दादा-दादी) अकेलेपन या जोड़ों के दर्द से जूझ रहे हैं। बीमारियां भी अब उम्र देखकर नहीं आतीं; जो ब्लड प्रेशर कभी बुढ़ापे की निशानी था, वह आज युवाओं को जकड़ रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसी संजीवनी है जो पूरे परिवार को एक साथ ला सके, उनका स्वास्थ्य दुरुस्त कर सके और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे? जवाब है— Yogasana। लेकिन यहाँ एक पेंच है। क्या जो आसन एक 15 साल का फुर्तीला बच्चा कर सकता है, वही आसन 70 साल के दादाजी भी कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। हर उम्र के शरीर की जरूरतें, उसकी हड्डियां और उसका लचीलापन अलग होता है।

एक संपादक के नजरिए से आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी वैज्ञानिक और व्यावहारिक गाइड, जिसे पढ़कर आप समझ जाएंगे कि आपके घर के किस सदस्य के लिए कौन सा Yogasana सबसे बेहतरीन और जादुई साबित होने वाला है।

देखिए कैसे एक साथ योग कर रहा है पूरा परिवार

नीचे दी गई खूबसूरत तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे सुबह की ताजी हवा के बीच परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ बैठकर योग कर रही हैं, जो आपसी जुड़ाव और बेहतर सेहत का सबसे सुंदर उदाहरण है।

सुबह के शांत और ताजे वातावरण में एक साथ बैठकर Yogasana और ध्यान करते हुए एक भारतीय परिवार के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे, जो पूरे परिवार के स्वास्थ्य और आपसी जुड़ाव को दर्शाता है।
Yogasana for All: उम्र के हर पड़ाव पर शरीर को निरोगी और ऊर्जावान रखने का सबसे सरल और प्राकृतिक भारतीय साधन।

ऊर्जावान बच्चों और छात्रों के लिए: एकाग्रता और लंबाई बढ़ाने वाले योगासन (Yogasana)

आज के बच्चों की सबसे बड़ी समस्या है— फोकस की कमी (Lack of Concentration) और लगातार गैजेट्स के इस्तेमाल से खराब होता उनका शारीरिक पोस्चर (पोजीशन)। पढ़ाई का बढ़ता बोझ और परीक्षा का डर उन्हें बचपन में ही तनाव दे रहा है। बच्चों का शरीर बेहद लचीला होता है, इसलिए उनके लिए ऐसे Yogasana होने चाहिए जो उनकी रीढ़ की हड्डी को मजबूत करें, लंबाई बढ़ाएं और दिमाग को तेज करें।

  • ताड़ासन (Palm Tree Pose): बच्चों के लिए यह सबसे बेहतरीन आसन है। इसमें दोनों हाथों को ऊपर उठाकर उंगलियों को आपस में फंसाया जाता है और एड़ियों के बल पूरे शरीर को ऊपर खींचा जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह बच्चों की रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है और ग्रोथ हार्मोन्स को उत्तेजित करके उनकी लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।
  • वृक्षासन (Tree Pose): इस आसन में एक पैर पर पूरे शरीर का संतुलन बनाना होता है। यह बच्चों के दिमाग के संतुलन और एकाग्रता को कई गुना बढ़ा देता है। जो छात्र पढ़ते समय जल्दी भटक जाते हैं, उन्हें यह रोज 2 मिनट जरूर करना चाहिए।
  • शीर्षासन या सर्वांगासन: थोड़े बड़े छात्रों के लिए यह आसन दिमागी बत्ती जलाने जैसा है। इससे सिर की तरफ रक्त का संचार बढ़ता है, जिससे याददाश्त (Memory Power) और आंखों की रोशनी तेज होती है।

घर की रीढ़ यानी गृहिणियों और कामकाजी महिलाओं के लिए योगासन (Yogasana)

हमारे समाज में महिलाएं पूरे घर का ख्याल रखती हैं, लेकिन जब बात खुद की सेहत की आती है, तो वे सबसे पीछे रह जाती हैं। रसोई में घंटों खड़े रहना, झुककर काम करना और इसके साथ ही थायराइड, पीसीओडी (PCOD) और हार्मोनल असंतुलन की समस्याओं से जूझना महिलाओं की आम कहानी है। महिलाओं को ऐसे आसनों की जरूरत है जो उनकी पेल्विक मसल्स (कमर के निचले हिस्से) को मजबूत करें और तनाव दूर करें।

  • मार्जरी आसन (Cat-Cow Pose): घुटनों और हाथों के बल बिल्ली की मुद्रा में आकर रीढ़ की हड्डी को ऊपर-नीचे करने का यह Yogasana उन महिलाओं के लिए वरदान है, जिन्हें दिन भर काम करने के बाद पीठ और कमर के निचले हिस्से में भयंकर दर्द रहता है। यह रीढ़ को बेहद लचीला बनाता है।
  • बद्ध कोणासन (Butterfly Pose): तितली आसन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी माना गया है। यह जांघों और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को खोलता है। डॉक्टरों की राय में, यह महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता, थायराइड और तनाव को नियंत्रित करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।
  • भुजंगासन (Cobra Pose): पेट के बल लेटकर छाती को ऊपर उठाने की यह क्रिया पेट की चर्बी को कम करती है, पाचन दुरुस्त करती है और महिलाओं के गर्भाशय (Uterus) को स्वस्थ रखती है।

वरिष्ठ नागरिकों (बुजुर्गों) के लिए: जोड़ों के दर्द और सुकून की नींद वाले योगासन (Yogasana)

60 की उम्र पार करने के बाद शरीर में वात (वायु) बढ़ने लगता है, जिससे जोड़ों में दर्द, घुटनों की ग्रीस कम होना और अनिद्रा (रात में नींद न आना) जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। बुजुर्गों की हड्डियां कमजोर होती हैं, इसलिए उन्हें कभी भी झटके वाले या अत्यधिक कठिन आसन नहीं करने चाहिए। उनके लिए सूक्ष्म व्यायाम और हल्के Yogasana ही सबसे अच्छे होते हैं।

1.सूक्ष्म व्यायाम (Joint Movements):जोड़ों के लचीलेपन के लिए.

आसनों की शुरुआत से पहले बुजुर्गों को कुर्सी पर या बिस्तर पर बैठकर केवल उंगलियों, कलाई, टखनों और गर्दन को धीरे-धीरे क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाना चाहिए। इससे जोड़ों में रक्त का संचार बढ़ता है और जकड़न दूर होती है।

2.वज्रासन (Thunderbolt Pose):पाचन और घुटनों के लिए.

यह एकमात्र ऐसा आसन है जो खाना खाने के तुरंत बाद किया जा सकता है। पैरों को पीछे मोड़कर एड़ियों पर बैठने से पैरों की नसें मजबूत होती हैं और बुढ़ापे में अपच व गैस की समस्या से बड़ी राहत मिलती है। (नोट: जिन बुजुर्गों के घुटनों का ऑपरेशन हुआ हो, वे इसे न करें)।

3.शवासन और भ्रामरी प्राणायाम:मानसिक शांति और बेहतर नींद के लिए.

बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ा Yogasana है ‘शवासन’। पीठ के बल पूरी तरह ढीला लेटकर अपनी सांसों को देखना शरीर के अंग-अंग को रिपेयर करता है। सोने से पहले भ्रामरी प्राणायाम करने से बुढ़ापे में आने वाली अनिद्रा (Insomnia) की बीमारी बिना किसी दवा के ठीक हो जाती है।

एक नजर में समझें: पूरे परिवार का योग चार्ट

ताकि आपके घर का हर सदस्य आसानी से समझ सके, नीचे दी गई तालिका को अपनी दीवार या फ्रिज पर चिपका लें:

उम्र / वर्गमुख्य शारीरिक समस्याबेस्ट योगासन (Yogasana)मुख्य लाभ
बच्चे और छात्रकम एकाग्रता, खराब पोस्चर, लंबाई न बढ़ना।ताड़ासन, वृक्षासन, पश्चिमोत्तानासनलंबाई बढ़ती है, याददाश्त तेज होती है, फोकस बढ़ता है।
महिलाएं / गृहिणियांपीठ दर्द, हार्मोनल असंतुलन, थायराइड, तनाव।बद्ध कोणासन (बटरफ्लाई), मार्जरी आसन, भुजंगासनकमर दर्द से राहत, हार्मोन्स का संतुलन, पेट की चर्बी कम।
वरिष्ठ नागरिक (बुजुर्ग)जोड़ों में दर्द, अनिद्रा, पाचन की कमजोरी, अकेलापन।सूक्ष्म व्यायाम, वज्रासन, शवासन, भ्रामरीजोड़ों की जकड़न दूर होती है, गहरी नींद आती है, बीपी सामान्य।

बिहारस्कैन एडिटर टेक: संडे की छुट्टी पर मॉल जाने से बेहतर है 20 मिनट का पारिवारिक योग

2026 के इस हाई-टेक और व्यस्त दौर में, हमने सुख-सुविधा के साधन तो बहुत खरीद लिए हैं, लेकिन शांति और सेहत कहीं पीछे छूट गई है। आज माता-पिता बच्चों को महंगी कोचिंग भेज रहे हैं, खुद महंगे होटलों में खा रहे हैं और बुजुर्गों के लिए दवाइयों का डिब्बा ला रहे हैं। लेकिन असली खुशी और सेहत पैसे से नहीं, थोड़े से अनुशासन से आती है।

बिहारस्केन की संपादकीय टीम का यह मानना है कि वीकेंड पर पूरा परिवार मिलकर जो समय सिनेमा हॉल या मॉल में पैसे उड़ाने में बिताता है, उससे कहीं बेहतर है कि दिन की शुरुआत एक साथ योगामैट पर हो। मुंगेर के योग योगियों ने हमेशा यही संदेश दिया है कि योग जोड़ने का नाम है। जब दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे एक साथ बैठकर अनुलोम-विलोम करेंगे, तो घर का माहौल किसी मंदिर जैसा पवित्र हो जाएगा। बीमारियां तो दूर भागेंगी ही, पीढ़ियों के बीच का वैचारिक फासला (Generation Gap) भी मिट जाएगा।

क्या आपके घर में भी दादा-दादी और बच्चे एक साथ समय बिताते हैं? आपके परिवार में योग को लेकर क्या माहौल है? कमेंट बॉक्स में अपने अनुभव और विचार हमारे साथ जरूर साझा करें।

योग सप्ताह 2026 की अन्य कड़ियां

भाग 1
भाग 2
भाग 3
भाग 4
भाग 5
भाग 6
भाग 7

6 thoughts on “Yogasana: दादा-दादी से लेकर पोते-पोतियों तक”

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