समस्तीपुर: नाबार्ड की अनूठी पहल, जूट के हुनर से संवर रही महिलाओं की तकदीर; डीडीसी ने की हौसला अफजाई

समस्तीपुर: जिले के परतापुर स्थित स्वयं सहायता समूह भवन में इन दिनों एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। मौका था राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के प्रायोजन में चले 20 दिवसीय जूट हस्तशिल्प कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच के समापन का। ‘अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन’ (औसेफा) की ओर से आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम (LEDPI) के तहत आयोजित इस ट्रेनिंग में जिले की 30 महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जूट के खूबसूरत रेशों से बेहतरीन हस्तशिल्प उत्पाद बनाना सीखा। इस पूरी पहल का मुख्य मकसद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत करना है।

डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह बोले- अपनी कला को बनाएं ताकत

समापन समारोह में पहुंचे उप विकास आयुक्त (DDC) सूर्य प्रताप सिंह ने जब प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से बातचीत की, तो माहौल और भी प्रेरणादायक हो गया। उन्होंने महिलाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि भारत कभी अपने शानदार उत्पादों के निर्यात के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता था। आज भी विदेशी बाजारों में जूट से बने कपड़ों और इको-फ्रेंडली वस्तुओं की भारी मांग है।

डीडीसी ने महिलाओं से अपील करते हुए कहा, “आप अपनी इस कला को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए। किसी भी बड़े काम की शुरुआत छोटे कदम से ही होती है, इसलिए छोटे स्तर पर काम शुरू करें और धीरे-धीरे अपने इस व्यवसाय को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाएं।”

प्लास्टिक को कहें ना, जूट को अपनाएं

पर्यावरण पर मंडराते खतरे को लेकर डीडीसी ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रही प्लास्टिक की चीजें हमारी धरती को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसके मुकाबले जूट से बने उत्पाद पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) हैं। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए जूट के सामानों की जमकर तारीफ की और नाबार्ड तथा औसेफा की इस रोजगारोन्मुखी कोशिश को मील का पत्थर बताया।

बैंक से मिलेगी कारोबार को रफ्तार

इस खास मौके पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (DDM) अभिनव कृष्ण ने पूरे ट्रेनिंग प्रोग्राम की रूपरेखा रखी। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से हमारी जीविका दीदियों की आमदनी में सीधे इजाफा होगा और वे परिवार का संबल बन सकेंगी।

वहीं, बिहार ग्रामीण बैंक के सीनियर मैनेजर राहुल कुमार और प्रतीक कुमार ने महिलाओं को बैंक की विभिन्न योजनाओं से रूबरू कराया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर महिलाएं अपना खुद का रोजगार शुरू करना चाहती हैं या अपने कारोबार को विस्तार देना चाहती हैं, तो बैंक हर कदम पर उनके साथ है और नियमानुसार पूरी आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान औसेफा के सचिव ललित कुमार, परियोजना निदेशक प्रेरणा कुमारी और अजित कुमार मालाकार समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और हुनर मिल जाए, तो समस्तीपुर की महिलाएं तरक्की की नई इबारत लिखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top