पटना: बिहार की सियासत में एक बार फिर से ‘सिक्योरिटी पॉलिटिक्स’ (लालू परिवार की सुरक्षा) की धमक सुनाई दे रही है। प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने आवास पर तैनात सभी सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया है।
ज़रा सोचिए, पटना के पॉश इलाके 10 सर्कुलर रोड (राबड़ी आवास) के बाहर अब पुलिस की वर्दी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ताओं का ‘सुरक्षा कवच’ नजर आ रहा है। इस घटनाक्रम ने बिहार के चुनावी माहौल में एक नया मुद्दा उछाल दिया है।
आखिर क्यों लौटाई गई सरकारी सुरक्षा?
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हाल ही में बिहार सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा (Z+ श्रेणी सुरक्षा) की समीक्षा की और उसमें कुछ बदलाव लागू कर दिए।
- सरकार का तर्क: प्रशासन और सत्ता पक्ष का कहना है कि यह एक रूटीन सुरक्षा समीक्षा (Security Review) प्रक्रिया का हिस्सा है।
- RJD का आरोप: राजद इसे सीधे तौर पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रही है। उनका आरोप है कि पहले तो सरकारी आवास को लेकर परिवार पर दबाव बनाया गया, और अब सुरक्षा में कटौती कर उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
इसी ‘सियासी साजिश’ के विरोध में लालू परिवार ने सम्राट सरकार की नई सुरक्षा व्यवस्था को सिरे से खारिज करते हुए पुलिसकर्मियों को लौटा दिया।
लाठी-डंडे लेकर पहरेदारी कर रहे RJD कार्यकर्ता
शनिवार की सुबह राजधानी पटना वालों ने राबड़ी आवास के बाहर एक बिल्कुल अलग ही तस्वीर देखी। जहां हमेशा भारी पुलिस बल तैनात रहता था, वहां अब राजद के सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता मोर्चे पर डटे हैं।

- कई कार्यकर्ताओं के हाथों में डंडे दिखे।
- आवास के बाहर कार्यकर्ताओं ने खुद ही बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्था संभाल ली है।
- पार्टी के नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार “लालू परिवार की सुरक्षा की सम्मानजनक व्यवस्था” दोबारा बहाल नहीं करती, तब तक उनके कार्यकर्ता ही अपने नेताओं की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे।
तेजस्वी यादव का ‘मास्टरस्ट्रोक’
इस पूरे विवाद में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का कदम सबसे ज्यादा चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेजस्वी यादव की सुरक्षा श्रेणी में सरकार ने कोई कटौती या बदलाव नहीं किया था। इसके बावजूद, अपने माता-पिता के समर्थन और सरकार के फैसले के विरोध में तेजस्वी ने भी अपने सुरक्षा गार्ड्स वापस लौटा दिए हैं।
सियासी जानकारों की मानें तो तेजस्वी का यह कदम साफ संदेश देता है कि RJD लालू परिवार की सुरक्षा के मुद्दे को केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संघर्ष के रूप में पेश करने के मूड में है।
सियासी गलियारों में क्या हैं इसके मायने?
पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ चंद बॉडीगार्ड्स की नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश है कि लालू परिवार सरकार के किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष इसे सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बेवजह की राजनीति बता रहा है।