(Bihar Coaching New Rules) पटना में बवाल के बाद एक्शन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी: बिहार में कोचिंग संस्थानों पर कसेगी नकेल, स्कूल-कॉलेज के समय क्लास चलाई तो रद्द होगा रजिस्ट्रेशन

पटना, बिहारस्कैन ब्यूरो।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर बिहार सरकार कोचिंग संस्थानों पर सख्त नियम (Bihar Coaching New Rules) लागू करने जा रही है। बिहार की राजधानी पटना में पिछले दिनों कोचिंग संचालकों, उनके निजी सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच हुए हाई-प्रोफाइल विवाद और गोलीबारी की घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर “दुकानदारी” और मनमानी करने वाले कोचिंग माफियाओं को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कड़े रुख और सीधे निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने के लिए एक बेहद सख्त (Bihar Coaching New Rules) नियमावली तैयार कर ली है। सरकार के इस नए फरमान के बाद अब पटना के नया टोला, मुसल्लहपुर हाट और कंकड़बाग से लेकर बिहार के तमाम जिलों में चलने वाले कोचिंग सेंटरों के ‘मठाधीशों’ में हड़कंप मच गया है।

क्या है सम्राट सरकार का नया फरमान? इन 2 बड़े बदलावों को समझिए

बिहारस्केन को मिली इनसाइड रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस बार सीधे तौर पर दो ऐसे चक्रव्यूह तैयार किए हैं, जिससे कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर पूरी तरह रोक लग जाएगी:

Bihar-Coaching-New-Rules सख्ती को दर्शाती तस्वीर, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कोचिंग सेंटर, छात्र और सरकारी निरीक्षण का दृश्य दिखाया गया है।
पटना में कोचिंग विवाद के बाद बिहार सरकार ने नया नियम लागू करने की तैयारी की है, जिसके तहत स्कूल-कॉलेज समय में कोचिंग चलाने वाले संस्थानों पर कार्रवाई होगी।

1. स्कूल-कॉलेज के समय कोचिंग चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध

अब बिहार में कोई भी कोचिंग संस्थान सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे के बीच अपनी कक्षाएं संचालित नहीं कर सकेगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि छात्र स्कूल और कॉलेज बंक करके सीधे कोचिंगों का रुख कर रहे थे, जिससे सरकारी शिक्षण संस्थानों में उपस्थिति न के बराबर हो गई थी। अगर कोई भी संस्थान इस समय सीमा का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसका रजिस्ट्रेशन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।

2. छात्रों का बनेगा डिजिटल डेटाबेस

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि बिहार के हर कोचिंग संस्थान को अपने यहां पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र का पूरा ब्यौरा (जैसे— छात्र किस स्कूल/कॉलेज का है, उसकी कोचिंग में अटेंडेंस क्या है) सरकार के पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे सरकार यह ट्रैक कर सकेगी कि बच्चे अपनी नियमित स्कूली शिक्षा छोड़ तो नहीं रहे हैं।

बिहार का परिप्रेक्ष्य: ‘भूतिया बंगले’ बन चुके सरकारी स्कूलों को बचाने की कवायद

एक शिक्षाविद के नजरिए से देखें तो पटना और बिहार के अन्य बड़े शहर देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरे हैं, जो एक गौरव की बात है। लेकिन इसका दूसरा और कड़वा पहलू यह है कि इस अंधी दौड़ के चक्कर में बिहार के सरकारी स्कूल और कॉलेज सिर्फ ‘एडमिशन सेंटर’ और ‘भूतिया बंगले’ बनकर रह गए हैं। बच्चे कॉलेजों में सिर्फ रसीद कटाते हैं और सुबह से शाम तक कोचिंगों में बोरा बिछाकर रट्टा मारते हैं।

जमीनी हकीकत: सरकार को लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि कई सरकारी शिक्षक भी इन प्राइवेट कोचिंगों में ‘पार्ट-टाइम’ सेवा दे रहे हैं। ऊपर से, हाल ही में खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग विवाद के बाद सड़कों पर जो अराजकता दिखी, उसने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर समय रहते इन कोचिंगों पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं कसा गया, तो छात्रों का भविष्य और राज्य की कानून-व्यवस्था दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।

एक नजर में समझें: नए नियम से क्या बदलेगा?

वर्तमान स्थिति (पुरानी व्यवस्था)नए नियम के बाद (सम्राट सरकार की व्यवस्था)समय की आजादी: सुबह से लेकर रात तक कभी भी बैच चलते थे।समय पर पाबंदी: सुबह 9 से शाम 4 बजे के बीच कोचिंग पूरी तरह बंद।कोई डेटा नहीं: किस कोचिंग में कितने लाख बच्चे पढ़ रहे हैं, सरकार को खबर नहीं।डिजिटल रिकॉर्ड: हर छात्र का डेटा और स्कूल की जानकारी अनिवार्य।क्षमता से अधिक भीड़: एक-एक हॉल में 500 से 1000 बच्चे भेड़-बकरियों की तरह।इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट: जिलाधिकारियों (DMs) की टीम करेगी हॉल और सुरक्षा की जांच।

बिहारस्कैन का नजरिया: नियम तो अच्छे हैं, लेकिन क्या जमीन पर उतरेंगे?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह कदम कागजों पर बेहद सराहनीय और स्वागत योग्य है। इससे न केवल सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि कोचिंगों के नाम पर चल रही अवैध उगाही और असुरक्षित माहौल पर भी रोक लगेगी। लेकिन सवाल वही पुराना है— क्या बिहार की नौकरशाही इसे ईमानदारी से जमीन पर लागू करवा पाएगी?

इससे पहले भी बिहार में कोचिंग एक्ट बना था, लेकिन वह केवल फाइलों की शोभा बढ़ाता रह गया। इस बार मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों (DMs) को सीधे कमान दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पटना के रसूखदार ‘कोचिंग मठाधीश’ इस नए हंटर के सामने सरेंडर करते हैं या फिर कोई नया बीच का रास्ता निकालते हैं।

आप सरकार के इस फैसले को किस नजरिए से देखते हैं? क्या स्कूल टाइमिंग में कोचिंग बंद होने से शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।

1 thought on “(Bihar Coaching New Rules) पटना में बवाल के बाद एक्शन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी: बिहार में कोचिंग संस्थानों पर कसेगी नकेल, स्कूल-कॉलेज के समय क्लास चलाई तो रद्द होगा रजिस्ट्रेशन”

  1. शिक्षा व्यवस्था जरूर सुधरेगा सर बस सही प्रयासों की जरूरत है ।

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