सिपरी (SIPRI) रिपोर्ट के इस खुलासे से बीजिंग से इस्लामाबाद तक क्यों मची खलबली?
नई दिल्ली/पटना, बिहारस्कैन न्यूज डेस्क। (India Nuclear Warheads Deployment) वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक स्थिति को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। रक्षा मामलों पर नजर रखने वाली दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्वीडिश संस्था ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) ने अपनी ताजा ‘इयरबुक 2026’ में एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इतिहास में पहली बार शांति काल (Peacetime) के दौरान 12 परमाणु हथियारों (Nuclear Warheads) को ऑपरेशनल रूप से तैनात कर दिया है।
अब तक माना जाता था कि भारत अपने परमाणु बमों को मिसाइलों या लॉन्चर्स से अलग बेहद सुरक्षित बंकरों (गोदामों) में रखता है, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना या गलतफहमी से बचा जा सके। लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चीन-पाकिस्तान की दोहरी चुनौती के बीच भारत ने अपनी परमाणु नीति में एक मूक लेकिन बेहद आक्रामक बदलाव किया है।
देखिए समंदर में भारत की अभेद्य न्यूक्लियर ट्रायड ताकत
नीचे दी गई तस्वीर में आप भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी (SSBN) को देख सकते हैं, जो गहरे समंदर में ‘साइलेंट किलर’ की तरह गश्त करती है और भारत की सेकेंड स्ट्राइक क्षमता का सबसे बड़ा आधार है।

क्या है भारत की रणनीति में आया यह ऐतिहासिक बदलाव?
सिपरी का यह दावा भारत की परमाणु नीति के एक नए युग की शुरुआत की तरफ इशारा करता है। दशकों से भारत की (India Nuclear Warheads Deployment ) न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन ‘कैनेस्टराइज्ड’ (Canisterized) मिसाइलों और अलग रखे गए वॉरहेड्स पर टिकी थी। इसका मतलब यह था कि हमारे परमाणु हथियार पूरी तरह से असेंबल नहीं थे।
क्रोनोलॉजी समझिए: सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अब कुछ परमाणु हथियारों को मिसाइलों के साथ जोड़ने (Mating) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मतलब यह है कि ये 12 परमाणु हथियार ‘हाई ऑपरेशनल रेडीनेस’ मोड में हैं, यानी बटन दबाते ही दुश्मन को नेस्तनाबूद करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके अलावा भारत के कुल परमाणु हथियारों की संख्या भी पिछले साल के 180 से बढ़कर अब 190 हो गई है।
देश और सुरक्षा के नजरिए से इसके क्या हैं रणनीतिक मायने?
जब हम पटना या बिहार के आम चौक-चौराहों पर होने वाली चर्चाओं से हटकर देश की सुरक्षा के नजरिए से देखते हैं, तो यह कदम बेहद जरूरी नजर आता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन 12 परमाणु हथियारों की तैनाती भूमि आधारित मिसाइलों पर नहीं, बल्कि भारत की परमाणु पनडुब्बियों पर की गई है। हाल के समय में भारत ने अपनी नौसैनिक ताकत को अभूतपूर्व तरीके से बढ़ाया है। भारत ने INS अरिहंत के साथ-साथ INS अरिघात और INS अरिदमन जैसी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) को ऑपरेशनल मोड में उतारा है।
परमाणु पनडुब्बियां समंदर के भीतर महीनों तक छिपी रह सकती हैं। अगर कोई दुश्मन देश भारत पर पहला परमाणु हमला कर भी दे, तो समंदर में बैठी हमारी पनडुब्बियां उस हमले से सुरक्षित बच जाएंगी और वहीं से ऐसा जवाबी हमला करेंगी कि दुश्मन का नामोनिशान मिट जाए। इसे रक्षा की भाषा में ‘सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी’ कहते हैं। यह अचूक क्षमता ही चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों को किसी भी दुस्साहस से रोकती है।
दुनिया के मुकाबले कहां खड़ा है भारत?
सिपरी 2026 की रिपोर्ट बताती है कि भले ही भारत ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया हो, लेकिन हम अभी भी वैश्विक हथियारों की होड़ में बेहद संयमित और जिम्मेदार देश हैं। पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की स्थिति बहुत ही संतुलित है।
नीचे दी गई तालिका से समझिए दुनिया और पड़ोसियों की असल स्थिति:
| देश | कुल परमाणु हथियार (2026) | तैनात परमाणु हथियार (Deployed) | सामरिक फोकस |
| चीन | 620 | 34 | लंबी दूरी की मिसाइलें और एशिया में वर्चस्व |
| भारत | 190 | 12 | विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध (Minimum Deterrence) |
| पाकिस्तान | 170 | 0 | भारत केंद्रित रक्षा रणनीति (सभी हथियार गोदाम में) |
चीन को काउंटर करने के लिए बढ़ा दायरा
सिपरी की रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है। भारत की मिसाइल आधुनिकीकरण प्रणाली (जैसे अग्नि-5 मिसाइल का एमआईआरवी तकनीक से लैस होना) अब तेजी से अपना फोकस बदल रही है। पहले जहां भारत की रणनीति केवल पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बनती थी, वहीं अब भारत का मुख्य फोकस ऐसी लंबी दूरी की प्रणालियों पर है जो चीन के सुदूर उत्तर-पूर्वी हिस्सों (जैसे बीजिंग और शंघाई) तक अचूक निशाना लगा सकें।
बिहारस्कैन एडिटर टेक: ‘नो फर्स्ट यूज’ पर कायम, मगर आंखें लाल
भारत सरकार ने हालांकि इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, क्योंकि परमाणु रणनीतियां हमेशा बेहद गोपनीय रखी जाती हैं। लेकिन यह साफ है कि भारत अपनी ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) यानी ‘पहले परमाणु हथियार न चलाने’ की नीति पर आज भी अडिग है।