पटना/स्पोर्ट्स डेस्क (बिहारस्कैन)। दुनिया के सबसे बड़े, सबसे महंगे और सबसे ज्यादा देखे जाने वाले खेल महाकुंभ यानी FIFA World Cup 2026 का शंखनाद: 3 देश, 48 टीमें और फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ शुरू; जानिए आज तक क्यों नहीं खेल पाया भारत? की शुरुआत 11 जून से हो चुकी है। फुटबॉल का यह नशा अब अगले एक महीने से ज्यादा समय तक यानी 19 जुलाई तक दुनिया भर के खेल प्रेमियों के सर चढ़कर बोलने वाला है। इस बार का विश्व कप कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि फुटबॉल के इतिहास में पहली बार तीन देश— अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा मिलकर इसकी संयुक्त मेजबानी कर रहे हैं।
बिहार के खेल प्रेमियों में भी, खासकर पटना के मुसल्लहपुर हाट और समस्तीपुर के काशीपुर से लेकर विद्यापतिनगर की गलियों तक, युवाओं के बीच मेसी, रोनाल्डो और एम्बाप्पे की जर्सी को लेकर गजब का क्रेज देखा जा रहा है।
देखिए FIFA World Cup 2026 के उद्घाटन समारोह की एक झलक
नीचे दी गई तस्वीर में आप अमेरिका के चमचमाते स्टेडियम में 11 जून को हुए FIFA World Cup 2026 के भव्य और ऐतिहासिक उद्घाटन समारोह के विहंगम दृश्य को देख सकते हैं।

48 टीमें और नया फॉर्मेट: क्यों खास है 2026 का वर्ल्ड कप?
इस बार का फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के पन्नों को बदलने वाला है। फीफा ने इस बार खेल का रोमांच बढ़ाने के लिए इसके पूरे स्वरूप (Format) को ही बदल दिया है:
- टीमों की संख्या में बंपर इजाफा: पहले सिर्फ 32 टीमें खेलती थीं, लेकिन इस बार 48 देश ट्रॉफी के लिए आपस में भिड़ रहे हैं।
- मुकाबलों की सेंचुरी: कुल 104 मैच खेले जाएंगे, जो पिछले वर्ल्ड कप के 64 मैचों से कहीं ज्यादा हैं।
- लंबा चलेगा रोमांच: 11 जून से शुरू हुआ यह सफर 19 जुलाई 2026 को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में होने वाले फाइनल मुकाबले के साथ खत्म होगा।
बिहारस्कैन स्पेशल: 1950 का वो सच… भारत आखिर क्यों नहीं खेल पाया वर्ल्ड कप?
जब भी फीफा वर्ल्ड कप शुरू होता है, तो हर भारतीय और हर बिहारी के जहन में एक टीस जरूर उठती है कि 140 करोड़ की आबादी वाला हमारा देश इस लिस्ट में क्यों नहीं है? सोशल मीडिया और पटना के चाय थड़ियों पर आज भी यह ‘अफवाह’ चलती है कि “भारतीय टीम के पास जूते नहीं थे, इसलिए फीफा ने हमें 1950 में खेलने नहीं दिया।”
तथ्य और जमीनी हकीकत: एक जिम्मेदार न्यूज़ पोर्टल होने के नाते बिहारस्कैन आपको इसकी असली ‘इनसाइड स्टोरी’ बताता है। यह सच है कि 1950 के ब्राजील वर्ल्ड कप के लिए भारत को खेलने का एकमात्र और सीधा मौका मिला था। फिलिपींस, इंडोनेशिया और बर्मा (म्यांमार) के हटने के बाद भारत बिना कोई मैच खेले ही क्वालिफाई कर गया था। लेकिन भारतीय टीम ब्राजील नहीं गई।जूते नहीं, बल्कि ये 3 बड़े कारण थे जिम्मेदार:
समय का अंतर (90 मिनट का नियम): भारत में तब घरेलू मैच 70 मिनट के होते थे, जबकि फीफा में 90 मिनट का नियम था। भारतीय अधिकारियों को डर था कि हमारे खिलाड़ी इतनी देर तक टिक नहीं पाएंगे।
पैसों की तंगी और लंबा सफर: उस जमाने में भारत से ब्राजील तक जहाज से जाने का खर्च बहुत ज्यादा था। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के पास इतने पैसे नहीं थे, हालांकि आयोजकों ने खर्च उठाने की बात कही थी, लेकिन देश नया-नया आजाद हुआ था और प्राथमिकताएं अलग थीं।
ओलंपिक को ज्यादा तवज्जो: उस दौर में भारत के लिए ओलंपिक ही सब कुछ था। भारतीय टीम ने 1948 के लंदन ओलंपिक में नंगे पैर खेलकर दुनिया को चौंकाया था। फेडरेशन को लगा कि वर्ल्ड कप से ज्यादा जरूरी ओलंपिक है।
बिहारस्कैन एडिटर टेक: कब जगेगा भारतीय फुटबॉल?
नीट (NEET) के लाठीचार्ज, राजनीति और पेपर लीक की खबरों के बीच खेल हमारे युवाओं के मानसिक तनाव को कम करने का एक बेहतरीन जरिया है। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा अगर क्रिकेट में कमाल कर रहे हैं, तो बिहार के मैदानों में फुटबॉल को लेकर भी वही इन्फ्रास्ट्रक्चर चाहिए।
कड़वा सच यह है कि 1950 की उस ऐतिहासिक भूल के बाद भारतीय फुटबॉल आज तक उस स्तर पर नहीं पहुंच सका कि वह अपने दम पर क्वालिफाई कर सके। सुनील छेत्री के संन्यास के बाद अब भारतीय फुटबॉल एक नए बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उम्मीद है कि सरकार की नई खेल नीतियों और युवाओं के जोश के दम पर, हम अपने जीवनकाल में भारत को तिरंगे के साथ फीफा वर्ल्ड कप के मैदान पर राष्ट्रगान गाते जरूर देखेंगे।
आप इस बार किस टीम को सपोर्ट कर रहे हैं? क्या मेसी की अर्जेंटीना दोबारा इतिहास रचेगी या रोनाल्डो का कोई चमत्कार दिखेगा? अपने पसंदीदा टीम को FIFA World Cup 2026 का चैंपियन बनने तक दिल से सपोर्ट करें साथ ही कमेंट बॉक्स में अपनी पसंदीदा टीम का नाम जरूर लिखें।
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