पटना/बिहार स्कैन
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षकों के लिए अब छुट्टी लेना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। शिक्षा विभाग ने अवकाश के नियमों में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए पूरी व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। नए फरमान के अनुसार, अब शिक्षकों को किसी भी प्रकार की छोटी या बड़ी छुट्टी के लिए सिर्फ और सिर्फ ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल का ही सहारा लेना होगा। मौखिक या कागजी आवेदनों को विभाग ने पूरी तरह अमान्य घोषित कर दिया है।
फर्जी हाजिरी पर लगेगी लगाम, बढ़ेगी पारदर्शिता विभाग का यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और शिक्षकों की फर्जी हाजिरी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस नई व्यवस्था से जहाँ एक ओर प्रणाली में सुचिता आएगी, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।
नए शिक्षकों के लिए EL के नियम सख्त सबसे बड़ा बदलाव नए शिक्षकों के लिए किया गया है। नई व्यवस्था के तहत, अब नियुक्त होने वाले नए शिक्षकों को शुरुआती तीन वर्षों तक उपार्जित अवकाश (Earned Leave – EL) का लाभ नहीं मिलेगा। हालाँकि, उनके लिए यह प्रावधान किया गया है कि लगातार 11 महीने काम करने के बाद वे एक महीने की बिना वेतन वाली छुट्टी ले सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी शिक्षक के लिए एक साथ अधिकतम दो महीने तक की ही छुट्टी लेने की सीमा तय की गई है।
छुट्टी मौलिक अधिकार नहीं: वेतन और सेवा में होगी टूट बिहार सेवा संहिता के नियम-152 का हवाला देते हुए स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी गई है कि छुट्टी शिक्षक का मौलिक अधिकार नहीं है। यदि कोई शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के गैर-हाजिर पाया जाता है, तो न केवल उसका उस अवधि का वेतन स्थगित कर दिया जाएगा, बल्कि इसे सेवा में एक ‘ब्रेक’ (टूट) भी माना जाएगा।
निर्णय लेने की समय-सीमा तय पूरी प्रक्रिया को समय-सीमा में बाँधा गया है ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी न हो। पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए आवेदन मिलने के बाद:
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आकस्मिक और विशेष अवकाश: प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को उसी दिन निर्णय लेना अनिवार्य होगा।
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मातृत्व, शिशु देखभाल और मेडिकल अवकाश: इन आवेदनों को तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भेजा जाएगा। यदि इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं होती, तो आवेदन स्वतः DEO के पास चला जाएगा और उन्हें अधिकतम सात कार्य दिवसों के भीतर इसे स्वीकृत करना होगा।
शिक्षा मंत्री ने बताया सरल और पारदर्शी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि इस नई पहल का मकसद छुट्टी की प्रक्रिया को अत्यधिक सरल और पारदर्शी बनाना है, ताकि शिक्षकों को किसी भी तरह की अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। सभी आवेदन ऑनलाइन होने से अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय हो जाएगी और जो भी अधिकारी निर्धारित समय-सीमा का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।