समस्तीपुर: दीपावली और छठ जैसे महापर्व सिर पर हैं। घरों में खुशियों का माहौल है और बाजारों में रौनक है। लेकिन इस त्योहार की मिठास के बीच एक बेहद कड़वा और डरावना सच छुपा हुआ है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने का फायदा उठाकर मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने में जुटे हैं। बाजारों में दूध, मावा, पनीर, घी और रंग-बिरंगी मिठाइयों के नाम पर खुलेआम ज़हर बेचा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि त्योहार के इन दिनों में जब खाद्य सुरक्षा विभाग को पूरी तरह मुस्तैद होना चाहिए था, तब जिम्मेदार अधिकारी और महकमा कुंभकर्णी नींद में सोया नजर आ रहा है।
त्योहारों का सीजन और जिम्मेदार अधिकारी ‘नदारद’
जब Samastipur Town Media की टीम ने धरातल पर सच जानने के लिए एफएसएसएआई (FSSAI) के जिला कार्यालय का रुख किया, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका हुआ था।
जब इस बारे में जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर रामा स्वामी वेंकेंट रमन शर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने जो जवाब दिया वह और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने बताया कि उनके पास अकेले समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि दरभंगा और मधुबनी जैसे बड़े जिलों का भी अतिरिक्त प्रभार है। फील्ड में रहने का हवाला देकर उन्होंने कार्यालय बंद मिलने की बात कही। सवाल यह उठता है कि जब त्योहारों के वक्त ही विभाग के दफ्तर सूने पड़े रहेंगे, तो आम जनता की सेहत की रक्षा कौन करेगा?
कागजी कार्रवाई और धीमी रफ्तार
विभाग के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क है। अक्टूबर महीने में विभाग की ओर से कुल 23 सैंपल जरूर एकत्र किए गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी एक भी सैंपल की लैब टेस्ट रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
जब अधिकारियों से यह पूछा गया कि पिछले मामलों में कितने सैंपल फेल हुए, कितने दुकानदारों पर जुर्माना लगा या कितनों के खिलाफ कोर्ट में केस चला, तो अधिकारी सटीक आंकड़े तक नहीं दे पाए। हां, इतना जरूर सामने आया कि शहर के स्टेशन चौक स्थित एक नामी होटल का लाइसेंस रद्द किया गया था, लेकिन कमाल देखिए कि उसी होटल संचालक ने नाम बदलकर नया लाइसेंस पाने के लिए फिर से आवेदन भी कर दिया और होटल धड़ल्ले से आज भी संचालित हो रहा है।
सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं रंग-बिरंगी मिठाइयां
त्योहारों के इस सीजन में बाजार की दुकानों पर सजी रंग-बिरंगी और चांदी के वर्क से चमकती मिठाइयां दिखने में जितनी आकर्षक लग रही हैं, सेहत के लिए उतनी ही खतरनाक साबित हो सकती हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले घटिया किस्म के रंग और सिंथेटिक मावा लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में ले सकते हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई की सुस्त रफ्तार मिलावटखोरों के हौसले बुलंद कर रही है।