पटना में आधी रात को ‘शिक्षा के हब’ में गैंगवार: खान सर बनाम रोशन आनंद; थार, बुलेट और मुर्गा पार्टी की होड़ ने पटना को बनाया अखाड़ा?

कोचिंग दिग्गजों की जंग में तब्दील हुआ पटना!

पटना: देश भर में ‘शिक्षा की राजधानी’ के रूप में मशहूर पटना का मुसल्लहपुर हाट और नया टोला इलाका सोमवार की आधी रात को अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट, मारपीट और तोड़फोड़ से दहल उठा। खबर है कि देश के सबसे लोकप्रिय और चर्चित शिक्षक खान सर (Khan Sir) के कोचिंग सेंटर को निशाना बनाकर उपद्रवियों ने जमकर बवाल काटा। इस घटना ने जहां एक तरफ पटना की कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं, वहीं दूसरी तरफ यहां रहकर सरकारी नौकरी का सपना देख रहे लाखों छात्रों के बीच खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।

लेकिन रुकिए! यह कोई आम आपराधिक घटना या सड़क छाप गुंडों की हरकत नहीं है। इस गोलीबारी और तोड़फोड़ के पीछे जो ‘इनसाइड स्टोरी’ निकलकर सामने आ रही है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। पुलिस सूत्रों और स्थानीय गलियारों की मानें तो यह जंग पटना के दो ‘कोचिंग दिग्गजों’ के बीच सालों से सुलग रही वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है: खान सर बनाम रोशन आनंद यादव (ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी)।

रिजल्ट आते ही शुरू होता है ‘खून-खराबा’ और दावों का खेल

पटना के प्रतियोगी परीक्षाओं के बाजार में यह बात जगजाहिर है कि जब-जब BPSC, बिहार पुलिस या बिहार दरोगा का फाइनल रिजल्ट आता है, तब-तब इन दोनों दिग्गजों (खान सर बनाम रोशन आनंद) के बीच का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। इसके बाद शुरू होता है तीन चरणों का गंदा खेल:

  1. पोस्टर वॉर: खान सर का दावा होता है कि सबसे ज्यादा रिजल्ट उनके ऐप और कोचिंग से हुआ, तो दूसरी तरफ से रोशन आनंद यादव ठोक कर कहते हैं कि असली ‘दरोगा फैक्ट्री’ तो उनकी ज्ञान बिंदु एकेडमी है।
  2. टॉपर खरीदने के आरोप: दोनों ही संस्थान एक-दूसरे पर छात्रों के फर्जी डेटा दिखाने, एक ही छात्र की फोटो दोनों जगह छापने और असली टॉपरों को मोटी रकम देकर खरीदने के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं।

मुर्गा, मछली, बुलेट और थार: ये शिक्षा है या सट्टेबाजी?

बिहार के गांव-देहात से आने वाले गरीब छात्र शायद पटना की इस चकाचौंध के पीछे छिपे घिनौने सच को नहीं जानते। रिजल्ट के बाद छात्रों को अपनी तरफ खींचने के लिए शिक्षा के इन बड़े-बड़े मंदिरों में जो खेल चल रहा है, उसी ने आज पटना की सड़कों को अखाड़ा बना दिया है।

पटना के एक स्थानीय छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “रिजल्ट आते ही यहाँ अजीब होड़ मच जाती है। कोई छात्रों के लिए ‘मछली पार्टी’ का एलान करता है, तो कोई ‘मुर्गा पार्टी’ उड़वा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब छात्रों को अपनी तरफ खींचने के लिए रील बनाई जाती है और खुलेआम बुलेट बाइक और महिंद्रा थार (Thar) गिफ्ट करने के वादे किए जाते हैं।”

सवाल यह उठता है कि जो शिक्षक कल तक बच्चों को सादगी और मेहनत का पाठ पढ़ाते थे, आज वो खुद करोड़ों के इस व्यापार में इतने अंधे हो चुके हैं कि उनके चेले और गुर्गे सड़कों पर लाठी-डंडे और कट्टे लहरा रहे हैं।

क्या इस जंग (खान सर बनाम रोशन आनंद) में उलझ गया है ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण?

इस पूरे विवाद का एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक पहलू भी अब सोशल मीडिया पर तैरने लगा है। खान सर (जो अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि के लिए जाने जाते हैं) और रोशन आनंद यादव की इस आपसी भिड़ंत को बिहार के कुछ राजनीतिक विश्लेषक पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण के चश्मे से भी देख रहे हैं।

इंटरनेट पर चर्चा गर्म है कि शिक्षा और अरबों रुपये के इस कोचिंग व्यापार की अंधी दौड़ में क्या धरातल पर ‘MY समीकरण’ कमजोर हो रहा है? या फिर कुछ असामाजिक तत्व इस व्यावसायिक लड़ाई को जानबूझकर जातीय और धार्मिक रंग देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की तैयारी में हैं? पुलिस इस एंगल पर भी पैनी नजर रख रही है।

बिहारस्कैन का नजरिया: छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो!

जो शिक्षक कभी समाज को दिशा दिखाने और ज्ञान बांटने के लिए पूजे जाते थे, आज उनके बीच की आपसी खुन्नस और कॉर्पोरेट कॉम्पिटिशन सड़कों पर गैंगवार करवा रहा है। बिहार के दूर-दराज के गांवों से गरीब माता-पिता अपना पेट काटकर, कर्ज लेकर अपने बच्चों को पटना इस उम्मीद के साथ भेजते हैं कि उनका बच्चा अफसर बनेगा, इसलिए नहीं कि वह किसी कोचिंग माफिया के ‘गैंगवार’ का हिस्सा बन जाए।

अगर पढ़ाई के नाम पर ये कोचिंग संस्थान अपराधियों के ठिकाने बन चुके हैं, तो अब समय आ गया है कि छात्र और अभिभावक अपनी आंखें खोलें। ऐसी ‘थार और बुलेट’ वाली शिक्षा की चकाचौंध से दूर रहें, क्योंकि जहां बारूद की गंध हो, वहां विद्या की देवी कभी वास नहीं करतीं। प्रशासन को भी इस मामले में बिना किसी दबाव के दोनों पक्षों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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