Bihar Weather Update: पूसा कृषि विश्वविद्यालय का बड़ा अलर्ट! 28 अक्टूबर के बाद उत्तर बिहार में बदलेगा मौसम, गिरेगा पारा और बढ़ेगी ठंड

समस्तीपुर: बिहार में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। त्योहारी सीजन के बीच राज्य के मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संयुक्त रूप से नया और महत्वपूर्ण मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक भले ही मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन महीने के अंत यानी 28 अक्टूबर के बाद बारिश की भारी संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और ठंड का अहसास और ज्यादा बढ़ जाएगा।

तापमान में गिरावट: सुबह-शाम महसूस होने लगी हल्की ठंड

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में उत्तर बिहार का अधिकतम तापमान 29 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। न्यूनतम पारे में आ रही इस लगातार गिरावट के कारण अब सुबह और देर रात के वक्त लोगों को हल्की ठंडक का अहसास साफ तौर पर होने लगा है।

सुबह के वक्त सापेक्ष आर्द्रता 70% से 85% तक रहने के कारण हल्की धुंध या ओस (Fog/Dew) भी देखने को मिल सकती है। वहीं, दोपहर में धूप खिलने से हल्की गर्मी बनी रहेगी, लेकिन पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हवाओं के 4 से 7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने से मौसम सुहाना बना हुआ है।

28 अक्टूबर के बाद बारिश के आसार

विभाग के अनुसार, एक नए कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure System) के सक्रिय होने से 28 अक्टूबर के बाद समस्तीपुर, बेगूसराय समेत उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में हल्के से मध्यम बादल छा सकते हैं और बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है। बारिश होने के बाद तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे कड़ाके की ठंड की शुरुआत का संकेत मिल रहा है।

किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी: फसल सुरक्षित रखें

28 अक्टूबर के बाद बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने अन्नदाताओं (किसानों) के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि जो किसान भाई अपनी खरीफ फसलों (विशेषकर धान) की कटाई या मड़ाई (दौनी) कर रहे हैं, वे अत्यधिक सावधानी बरतें। पकी हुई फसलों को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थानों या गोदामों में समय पर भंडारण कर लें, ताकि अचानक होने वाली बारिश से फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सके।

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