पटना/मुजफ्फरपुर
बिहार के सरकारी स्कूलों में शुरुआती शिक्षा को लेकर एक बेहद सराहनीय और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। अब राज्य के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले पहली और दूसरी कक्षा के नौनिहाल किताबी और कठिन भाषा के बजाय अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय बोलियों में पढ़ाई करेंगे। बच्चों को उनकी अपनी घर की बोली में तालीम देने के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इसके तहत बिहार की छह प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं—भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका, मैथिली और अंगिका—में आकर्षक पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं।
क्यों उठाया गया यह कदम? राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विजन के मुताबिक, बच्चों की शुरुआती शिक्षा उनकी मातृभाषा में होने से वैचारिक स्पष्टता तेजी से आती है और विषय पर उनकी पकड़ मजबूत होती है। शिक्षाविदों का मानना है कि जब बच्चा अपनी जानी-पहचानी बोली में सीखता है, तो उसका डर खत्म होता है और पढ़ाई बोझ नहीं बल्कि खेल लगने लगती है।
इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए SCERT ने 28 से 31 अक्टूबर तक एक विशेष चार दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया है। इस कार्यशाला में राज्यभर के चुनिंदा और अनुभवी शिक्षकों की टीमें किताबें तैयार करने में जुटी हैं। खास बात यह है कि मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड की शिक्षिका ज्योत्सना वर्धन को ‘बज्जिका’ भाषा की टीम में शामिल किया गया है, जबकि इस पूरी कार्यशाला का कुशल संयोजन डॉ. जैनेंद्र कर रहे हैं।
बिहार का भाषाई और क्षेत्रीय स्वरूप बच्चों को उनकी स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का दायरा कुछ इस तरह तय किया गया है:
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भोजपुरी: पश्चिम बिहार के जिलों में।
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मगही: दक्षिण-मध्य बिहार का क्षेत्र।
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बज्जिका: उत्तर-मध्य बिहार की मुख्य बोली।
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मैथिली: उत्तर बिहार यानी संपूर्ण मिथिलांचल।
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अंगिका: दक्षिण-पूर्व बिहार का इलाका।
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सुरजापुरी: पूर्वोत्तर बिहार यानी सीमांचल क्षेत्र।
समय पर किताबें पहुँचाना एक बड़ी चुनौती इसमें कोई दो राय نہیں है कि बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए यह पहल एक ‘मील का पत्थर’ साबित होगी। हालांकि, कार्यशाला के बाद इन किताबों के अंतिम प्रारूप को अंतिम रूप देना, उनकी छपाई कराना और नए सत्र में समय पर छात्रों तक पहुँचाना शिक्षा विभाग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। अगर यह प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो बिहार की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में एक नया इतिहास लिखा जाएगा।