एजेंडा या साजिश?
पटना, बिहारस्कैन न्यूज डेस्क। कहते हैं कि बिहार की मिट्टी में राजनीति कूट-कूट कर भरी है, लेकिन जब यही राजनीति (neet paper leak bihar politics) देश के करोड़ों नौजवानों के भविष्य और उनके आंसुओं पर होने लगे, तो यह बेहद डरावनी हो जाती है। पिछले कुछ समय से नीट (NEET) और तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर जो आक्रोश सड़क से सोशल मीडिया तक उबल रहा था, आज वह अचानक गायब हो चुका है।
पर्दे के पीछे बैठे सिस्टम के ‘डायरेक्टरों’ ने एक ऐसी ऑस्कर विनिंग स्क्रिप्ट लिखी है कि बड़े-बड़े फिल्म मेकर भी शरमा जाएं। बिहार के कोचिंग हब पटना की गलियों से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस चुका है, जहां मुख्य आरोपी और (neet paper leak bihar accused) माफिया तो बैकसीट पर चले गए हैं और सामने आ खड़ी हुई है ‘जाति’ और ‘धर्म’ की वही पुरानी घिनौनी सियासत।
चरणबद्ध तरीके से समझिए इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ की क्रोनोलॉजी
जब हम कड़ियों को जोड़ते हैं, तो साफ नजर आता है कि जनता और युवाओं के गुस्से को दबाने के लिए किस तरह से विमर्श (नैरेटिव) का रुख मोड़ा गया:
1. पहला यू-टर्न: जब सीधे घिरने लगी सरकार
शुरुआत में जब NTA और परीक्षा एजेंसियों पर सवाल उठ रहे थे, तो देश का युवा एकजुट था। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सिर्फ एक ही मांग थी—NEET Paper Leak के विरोध में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और कड़ा कानून। सरकार पूरी तरह बैकफुट पर थी। लेकिन तभी मुख्यधारा के मीडिया के कुछ चेहरों को मैदान में उतारा गया। एसी स्टूडियो में बैठकर शिक्षकों को “दो कौड़ी का” बताया गया और पूरी चर्चा ‘NEET Paper Leak’ से हटकर ‘शिक्षक बनाम मीडिया’ की लड़ाई में तब्दील हो गई।
2. दूसरा यू-टर्न: ‘NEET Paper Leak माफिया‘ बन गया ‘कोचिंग माफिया’
जब सोशल मीडिया पर जनता भड़क गई और चाटुकार पत्रकारों की फजीहत होने लगी, तो स्क्रिप्ट बदली गई। जो सिस्टम और अधिकारी NEET Paper Leak के असली गुनहगारों को पकड़ने में नाकाम रहे थे, उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए सारा ठीकरा ‘कोचिंग माफिया’ के सिर फोड़ दिया। यानी असली लीक करने वाले गिरोह चर्चा से ही गायब कर दिए गए।
बिहार का कड़वा सच: छात्रों की इसी एकजुटता को तोड़ने के लिए इस विवाद (NEET Paper Leak) को पटना के दो बड़े कोचिंग संस्थानों और उनके शिक्षकों (खान सर और ज्ञान बिंदु वाले रोशन आनंद सर) के बीच की आपसी लड़ाई बना दिया गया। नतीजा? जो बच्चे कल तक एक साथ लड़ रहे थे, वो आज अलग-अलग खेमों में बंटकर सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से ही भिड़ रहे हैं।
जब खेल में घुसा बिहार का ‘जातीय और धार्मिक’ ब्रह्मास्त्र
बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। जब लगा कि छात्र फिर भी समझदार हैं और NEET Paper लीक को लेकर आंदोलन लम्बा चलेगा तो इसमें बिहार की सदाबहार ‘जातिगत राजनीति’ का तड़का लगाया गया। सोशल मीडिया पर जानबूझकर यह नैरेटिव सेट किया गया कि किस जाति के अफसर या नेता के इशारे पर ज्ञान बिंदु वाले शिक्षक पर कार्रवाई हुई और किसके इशारे पर खान सर को बचाया जा रहा है (भले ही कोर्ट से खान सर को राहत मिली हो)। जिन छात्रों को सिर्फ अपनी पढ़ाई से मतलब था, उनके दिमाग में यह ज़हर घोला गया कि फलाना शिक्षक यादव है, भूमिहार है, ब्राह्मण है या राजपूत है।
अंतिम हथियार: ‘हिंदू-मुस्लिम’ का रंग
और जब इस खेल का क्लाइमैक्स आया, तो इसे सीधा हिंदू-मुस्लिम का रंग दे दिया गया। कल तक जो मीडिया खान सर को राष्ट्रभक्त कहता नहीं थकता था, अचानक उनके थंबनेल पर ‘फैसल खान’ लिखा जाने लगा। दो शिक्षकों के बीच का सामान्य या व्यावसायिक मतभेद देखते ही देखते ‘जिहाद और धर्म’ के चश्मे से दिखाया जाने लगा। कुछ चंद डॉलर्स के व्यूज छापने वाले यूट्यूबर्स ने भी गुरुओं की जाति और धर्म खोजकर इस बहती गंगा में हाथ धोए।
एक नजर में समझें: मुद्दे का भटकाव
| आंदोलन का शुरुआती हफ्ता | आज की कड़वी हकीकत |
| मुख्य मुद्दा: NEET Paper Leak माफिया को जेल भेजो, परीक्षा रद्द करो। | आज का मुद्दा: खान सर बनाम रोशन आनंद सर, कौन सही कौन गलत? |
| एकजुटता: देश और बिहार के करोड़ों छात्र एक सुर में बोल रहे थे। | विभाजन: छात्र जातियों और खेमों में बंटकर आपस में लड़ रहे हैं। |
| निशाना: NTA, परीक्षा सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारी। | निशाना: एक-दूसरे का धर्म और जाति ढूंढना। |
बिहारस्कैन का नजरिया: इस लाशों के ढेर पर मौज किसकी है?
कड़वी सच्चाई यही है कि चाहे खान सर हों या रोशन आनंद सर, दोनों ने बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों के गरीब बच्चों को बेहद कम फीस में अफसर और डॉक्टर-इंजीनियर बनाने का सपना दिया है। ये दोनों हमारे राज्य की शान हैं। शिक्षा के मंदिर में जाति और धर्म का यह ज़हर किसी कैंसर से कम नहीं है।
इस पूरी साज़िश में असल नुकसान सिर्फ और सिर्फ उस आम बिहारी छात्र का हो रहा है, जिसकी जवानी (NEET Paper Leak) पेपर लीक, कोर्ट-कचहरी और लाठीचार्ज के बीच बर्बाद हो रही है। इस ड्रामे के बीच जो लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं और सिस्टम की दलाली कर रहे हैं, उनकी सच में मौज है।
क्या आपको भी लगता है कि हम एक बार फिर अपनी अस्मिता और हक की लड़ाई छोड़कर जाति-धर्म के जाल में फंस गए हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।
Wonderful 😊
Khaan sir aur gyan bindu neet ka coaching nhi chelate h sir.in dono ki ladai varchasw ko le kr h.
तस्वीर में जो शख्स हैं, इनका नाम प्रोफेसर बलराम तिवारी है। बलराम तिवारी सर यूट्यूब के जमाने से बहुत पहले के शिक्षक हैं, इसलिए इनके यूट्यूब पर बहुत कम लेक्चर मिलेंगे। यूट्यूब पर सर के जो भी लेक्चर मिले जाकर सुन लीजिए सब के सब अनमोल हैं, ज्ञान से ओतप्रोत। बलराम तिवारी सर के पढ़ाए हुए सैंकड़ों बच्चे UPSC और अलग-अलग स्टेट PCS में अधिकारी बने हैं। जी हां, एक दो नहीं सैंकड़ों, तीन चार सौ से ऊपर। सर हिंदी साहित्य पढ़ाते थे और दिल्ली में UPSC की तैयारी करने वाला बच्चा स्पेशली बलराम तिवारी सर से पढ़ने के लिए पटना आता था। खान मास्टर ने पटना को पहचान दी जैसी जब लोग बात करते हैं तो लोगों के आई क्यू पर तरस आता है। खान मास्टर चपरासी के लेवल का मास्टर है। दिक्कत यह है कि नरेंद्र मोदी के राज में WhatsApp University ने लोगों के आई क्यू को बहुत लो बना दिया है तो आज खान मास्टर शिक्षक का पैमाना हो गया है।
Good News
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