पटना/बिहार स्कैन
बिहार के कोसी इलाके के खेतों से निकलकर मखाना अब देश के कोने-कोने में अपनी धाक जमा रहा है। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और पौष्टिकता के दम पर कोसी का मखाना अब ग्लोबल सुपरफूड बनता जा रहा है। स्थिति यह है कि प्रमुख जिले सहरसा से हर रोज भारी मात्रा में मखाना पंजाब, दिल्ली और अहमदाबाद समेत देश के कई बड़े राज्यों के लिए भेजा जा रहा है। इस शानदार कारोबार से स्थानीय किसानों और व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं।
हर दिन हो रही है करोड़ों की सप्लाई
सहरसा रेलवे स्टेशन के माध्यम से हर दिन लगभग 40 से 50 बोरे मखाना दूसरे प्रांतों के लिए रवाना किया जा रहा है। इस माल की ढुलाई के लिए पूरबिया एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस और वैशाली एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का सहारा लिया जाता है।
एक बोरे में औसतन 9 से 10 किलो मखाना होता है। इस हिसाब से देखें, तो हर महीने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का मखाना अकेले सहरसा से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे रेलवे के पार्सल बिजनेस और राजस्व में भी जबरदस्त इजाफा हो रहा है।
बंपर पैदावार से कीमतों में आई राहत
व्यापारियों का कहना है कि इस साल मखाने का बंपर उत्पादन हुआ है, जिसकी वजह से आम ग्राहकों और खरीदारों को कीमतों में खासी राहत मिली है। मौजूदा बाजार में मखाना 600 रुपये से लेकर 1500 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है।
जबकि पिछले साल यही मखाना आसमान छूते हुए 2200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। मखाने की कीमत पूरी तरह से उसके साइज और क्वालिटी पर निर्भर करती है—छोटे, मध्यम और बड़े दाने अलग-अलग दरों पर बिकते हैं। चूंकि बाहरी राज्यों में बड़े साइज और प्रीमियम क्वालिटी के मखाने की डिमांड सबसे ज्यादा है, इसलिए छांटकर बेहतरीन क्वालिटी का माल ही बाहर भेजा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही पहचान
कोसी क्षेत्र के मखाने की क्वालिटी अब केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी गहरी छाप छोड़ रहा है। एक सुपरफूड के रूप में इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने बिहार के किसानों के लिए वैश्विक बाजारों के रास्ते खोल दिए हैं, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संकेत है।