समस्तीपुर। जिले के मॉडल स्कूलों में शामिल पीआर इंटर विद्यालय, कर्पूरीग्राम की व्यवस्था का जायजा लेने शुक्रवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कामेश्वर प्रसाद गुप्ता अचानक पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कक्षाओं से लेकर प्रयोगशाला और विद्यालय परिसर तक की स्थिति देखी। इस दौरान कई कमियां सामने आईं, जिन्हें जल्द दूर करने का निर्देश प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण झा को दिया गया।
डीईओ ने स्पष्ट कहा कि विद्यालय में बेहतर पढ़ाई के साथ बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रयोगशाला में रनिंग वाटर की व्यवस्था करने और जरूरत के अनुसार वॉश बेसिन लगवाने को कहा। वहीं, टूटे हुए बेंच-डेस्क की मरम्मत जल्द कराने का निर्देश दिया, ताकि विद्यार्थियों को कक्षा में बैठने में परेशानी न हो।
प्रयोगशाला से लेकर जिम तक की व्यवस्था सुधारने पर जोर
विद्यालय में उपलब्ध प्रयोगशाला, जिम और व्यायामशाला के संसाधनों को लेकर भी डीईओ ने आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिम के उपकरणों को व्यवस्थित रखा जाए और उनका उपयोग विद्यार्थियों के हित में किया जाए। परिसर में पड़ी खराब और अनुपयोगी सामग्री को भी नियमानुसार हटाने को कहा गया, ताकि विद्यालय का वातावरण साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहे।
आग से बचाव के इंतजाम और इमरजेंसी एस्केप मैप लगाने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। डीईओ ने विद्यालय भवन के अंदर और बाहर प्रमुख स्थानों पर अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) लगाने का निर्देश दिया। साथ ही विद्यालय के मुख्य द्वार पर आपातकालीन निकासी मानचित्र (इमरजेंसी एस्केप मैप) लगाने को कहा, ताकि आग या किसी अन्य आपात स्थिति में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता पता रहे।
विद्यार्थियों ने डीईओ के सामने रखीं अपनी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी अपनी समस्याएं जिला शिक्षा पदाधिकारी के सामने रखीं। डीईओ ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और आवश्यक पहल करने का भरोसा दिलाया।
इस मौके पर विद्यालय प्रबंधन समिति के शिक्षाविद् नित्यानंद राय, वरीय शिक्षिका डॉ. बेबी कुमारी, संजीव नयन, तरुण कुमार झा सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
डीईओ के इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराना है। अब देखने वाली बात होगी कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों पर विद्यालय प्रशासन कितनी जल्दी अमल करता है।