समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना और रसोइयों के मानदेय भुगतान को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात ये हैं कि पिछले पांच महीनों से फंड जारी न होने की वजह से दुकानदारों और वेंडरों ने स्कूलों को राशन देने से साफ हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे जिले के सरकारी स्कूलों में एमडीएम बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।
इस गंभीर समस्या को लेकर संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) मध्याह्न भोजन योजना, प्रेम शंकर झा से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारी को दो-टूक बताया कि पिछले पांच महीने से भुगतान न मिलने के कारण स्थानीय दुकानदार अब उधार में खाद्य सामग्री देने को तैयार नहीं हैं, जिससे स्कूलों में बच्चों का खाना बनाने का काम ठप होने की नौबत आ गई है।
डीपीओ ने दिया एक सप्ताह का अल्टीमेटम
शिक्षकों की इस चिंता पर प्रतिक्रिया देते हुए डीपीओ प्रेम शंकर झा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि अब इस योजना के तहत भुगतान एक नई व्यवस्था के तहत किया जाना है। अलग-अलग ब्लॉकों से मिले करीब 6 करोड़ रुपये के इस फंड का बिल (अभिश्रव) ऑफिशियल पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से पेमेंट में देरी हुई है।
इसके साथ ही, रसोइयों के मानदेय के भुगतान के लिए उनकी ‘पेई आईडी’ (Payee ID) बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है। डीपीओ ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया है कि अगले एक हफ्ते के अंदर सभी लंबित भुगतानों को क्लियर कर दिया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में ये दिग्गज रहे शामिल
डीपीओ से मिलने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में कई जाने-माने शिक्षक नेता शामिल थे। इनमें जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव अनिल कुमार, बिहार अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ के सचिव पवन कुमार यादव, बिहार नगर पंचायत प्रखंड शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राय और टीचर्स क्लब के जिला संयोजक सौरभ कुमार मुख्य रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा प्रधानाध्यापक संजय कुमार, अनुपम कुमार सिंह और अरुण कुमार यादव ने भी अपनी बात रखी।
शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि अगर प्रशासन द्वारा दिए गए एक हफ्ते के भीतर भुगतान नहीं होता है, तो स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना पूरी तरह से बंद हो जाएगी, जिसका सीधा असर गरीब बच्चों के पोषण पर पड़ेगा।