तिरहुत नहर या ‘मौत का वाटर पार्क’? रील और स्टंट के चक्कर में दांव पर जिंदगियां, 13 साल के मासूम की मौत के बाद पुलिस का कड़ा पहरा

बगहा (पश्चिम चंपारण): जैसे-जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है, बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आ रही है। बगहा-दो प्रखंड के बरवल में स्थित तिरहुत नहर का छलका (मौत का वाटर पार्क) इन दिनों युवाओं के लिए एक ‘देसी वाटर पार्क’ बन गया है। लेकिन ठहरिए, यह कोई मौज-मस्ती की सुरक्षित जगह नहीं है। सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स पाने और ‘रील’ बनाने की सनक ने इस जगह को एक खतरनाक डेथ ट्रैप (मौत के कुएं) में बदल दिया है। हाल ही में यहाँ हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है।

लाइक्स की भूख और जानलेवा स्टंट का कॉकटेल

स्थानीय लोगों की मानें तो यह नहर अब सिर्फ सिंचाई का जरिया नहीं रही, बल्कि रील कल्ट (Social Media Creators) का अड्डा बन चुकी है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहाँ सिर्फ बगहा ही नहीं, बल्कि नरकटियागंज, बेतिया और वाल्मीकिनगर जैसे दूर-दराज के इलाकों से भी हर दिन सैकड़ों लड़के-लड़कियां पहुँच रहे हैं।

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बगहा के बरवल स्थित तिरहुत नहर का वो छलका, जहाँ रील बनाने की चाहत युवाओं को मौत के मुंह में ढकेल रही है।

पानी के तेज बहाव के बीच ऊंचे पुल से छलांग लगाना, तैरते हुए खतरनाक पोज देना और फिर उसे इंस्टाग्राम या फेसबुक पर बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ पोस्ट करना इन युवाओं का नया शौक बन गया है। रविवार या छुट्टी के दिन तो यहाँ का नजारा किसी मेले जैसा होता है, जहाँ हर कोई मोबाइल थामे इस मौत का वाटर पार्क में अपनी जान जोखिम में डाल रहा होता है।

13 साल के तुलसी की मौत ने तोड़ी प्रशासन की नींद

यह जानलेवा शौक तब मातम में बदल गया, जब पिछले दिनों बनकटवा के रहने वाले 13 साल के मासूम तुलसी कुमार की इस नहर की गहराई में डूबने से मौत हो गई। रील बनाने के चक्कर में डूबे इस बच्चे की चीखें तो शांत हो गईं, लेकिन पीछे छोड़ गईं रोते-बिलखते माता-पिता और स्थानीय लोगों का गुस्सा। इस हादसे के बाद लोगों ने मांग की कि इस ‘खतरनाक पिकनिक स्पॉट (मौत का वाटर पार्क)’ पर तुरंत रोक लगाई जाए।

दिन में 4-5 बार पुलिस की रेड, खदेड़े जा रहे युवा

मासूम की मौत के बाद पटखौली थाना पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। पटखौली थानाध्यक्ष उत्पलकांत ने बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए गश्ती दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

“हमारी टीम अब दिन भर में कम से कम 4 से 5 बार अचानक (सरप्राइज रेड) मौके पर पहुंच रही है। जो भी युवक पानी में स्टंट करते या रील बनाते दिख रहे हैं, उन्हें खदेड़ा जा रहा है। पुलिस की पैनी नजर हर संदिग्ध गतिविधि पर है ताकि फिर किसी मां की गोद सूनी न हो।”

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सिर्फ पुलिस की लाठी से नहीं थमेगी यह सनक

एक जिम्मेदार मीडिया संस्थान होने के नाते हमारा मानना है कि हर मोड़ पर पुलिस का पहरा मुमकिन नहीं है। रील बनाने और रातों-रात वायरल होने का जो भूत आज की पीढ़ी के सर चढ़कर बोल रहा है, उसका इलाज सिर्फ खाकी के डर में नहीं है।

नहर का पानी बाहर से जितना शांत दिखता है, उसका अंदरूनी बहाव और छिपी हुई गहराई उतनी ही जानलेवा है। अच्छे से अच्छे तैराक भी इसके भंवर में फंसकर दम तोड़ देते हैं। ऐसे में अभिभावकों (Parents) की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है। अपने बच्चों पर नजर रखें, उन्हें समझाएं कि ‘लाइक्स’ तो वापस आ सकते हैं, लेकिन ‘लाइफ’ नहीं।

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