Burhanpur के धुलकोट गांव से सामने आई तस्वीरें देश के विकास और हर घर जल योजना के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच यहां की मासूम बच्चियां पानी की एक-एक बूंद के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। गांव के एक गहरे सूखे कुएं (मौत का कुआं) में रस्सी के सहारे उतरकर पानी निकालने की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
ग्रामीण इस कुएं को अब “मौत का कुआं” कहने लगे हैं। वजह साफ है—कुएं का जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि ऊपर से बाल्टी डालकर पानी निकालना संभव नहीं रहा। ऐसे में छोटी बच्चियों और महिलाओं को रस्सी पकड़कर कई फीट नीचे उतरना पड़ता है। कुएं की दीवारें टूटी हुई हैं, अंदर फिसलन है और सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं। जरा सी चूक सीधे जानलेवा साबित हो सकती है।
तपती गर्मी में पानी के लिए संघर्ष
धुलकोट गांव में इन दिनों हालात बेहद खराब हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच गांव के अधिकतर हैंडपंप सूख चुके हैं। पानी का दूसरा कोई साधन नहीं बचा है। सुबह होते ही गांव की महिलाएं और बच्चियां बर्तन लेकर कुएं के पास पहुंच जाती हैं। घंटों इंतजार और खतरे के बीच उन्हें थोड़ा-थोड़ा पानी मिल पाता है।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। स्कूल जाने की उम्र में बच्चियां अपनी जान जोखिम में डालकर परिवार के लिए पानी जुटा रही हैं। गांव के लोग बताते हैं कि कई बार बच्चे कुएं में उतरते समय फिसल चुके हैं, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि यह सिलसिला रुक नहीं पा रहा।
“प्यास से मरने से बेहतर खतरा उठाना”
गांव के एक बुजुर्ग ग्रामीण ने आंखों में बेबसी के साथ कहा,
“हमें पता है कि यह बहुत खतरनाक है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन अगर पानी नहीं लाएंगे तो खाना कैसे बनेगा, बच्चे क्या पिएंगे? प्यास से मरने से अच्छा है कि हम यह खतरा उठा लें।”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। गांव में पानी के टैंकर भी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोग अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर पानी जुटाने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
यह स्थिति तब सामने आई है जब सरकारें लगातार “हर घर नल से जल” और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे करती रही हैं। लेकिन धुलकोट की यह तस्वीरें जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित पेयजल व्यवस्था करने और गांव में नए बोरवेल या टैंकर सेवा शुरू करने की मांग की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
धुलकोट गांव की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल Media पर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि आखिर आजादी के इतने साल बाद भी लोगों को पानी के लिए मौत का जोखिम क्यों उठाना पड़ रहा है।
एक यूज़र ने लिखा,
“यह सिर्फ जल संकट नहीं, व्यवस्था की विफलता की तस्वीर है।”
वहीं दूसरे यूज़र ने कहा,
“अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो किसी दिन यह कुआं किसी मासूम की जान ले लेगा।”
फिलहाल गांव के लोग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। सवाल यही है कि क्या इन मासूम बच्चियों को ‘मौत के कुएं’ से मुक्ति मिलेगी, या फिर पानी के लिए उनका यह खतरनाक संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।