पटना/दरभंगा: बिहार के उच्च शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। अगर आप बिहार की किसी यूनिवर्सिटी से पीएचडी (PhD) करने की सोच रहे थे, तो आपके लिए नियम पूरी तरह बदल चुके हैं। राजभवन ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में होने वाली PhD Admission टेस्ट (PAT) को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है।
अब यूनिवर्सिटीज अपने स्तर पर कोई टेस्ट नहीं ले सकेंगी। शैक्षणिक सत्र 2024 और 2025 से PhD Admission के लिए अब सिर्फ और सिर्फ UGC-NET स्कोर को ही आधार बनाया जाएगा। यानी, नेट पास कैंडिडेट्स ही अब सीधे रिसर्च की राह पर आगे बढ़ सकेंगे।
राजभवन का कड़ा रुख: वापस होगी छात्रों की फीस
राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सूबे के सभी कुलपतियों (VCs) को इस नए नियम का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है। राजभवन की ओर से जारी इस फरमान में कुछ मुख्य बातें साफ की गई हैं:
- PAT पर पूरी तरह ब्रेक: सत्र 2024 और 2025 के लिए कोई भी यूनिवर्सिटी अपनी अलग से प्रवेश परीक्षा (PAT) आयोजित नहीं करेगी।
- पैसे होंगे रिफंड: जिन विश्वविद्यालयों ने PAT के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, लेकिन अभी तक परीक्षा नहीं कराई है, उन्हें अपना विज्ञापन तुरंत रद्द करना होगा। साथ ही, फॉर्म भरने वाले छात्रों की पूरी आवेदन फीस वापस लौटानी होगी।
- पुराने छात्र सुरक्षित: राहत की बात यह है कि जिन यूनिवर्सिटीज ने पहले ही PAT के जरिए एडमिशन प्रोसेस पूरा कर लिया है, उन छात्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उनकी पढ़ाई पहले की तरह चलती रहेगी।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
अकसर देखा जाता था कि अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में PAT परीक्षा के आयोजन और रिजल्ट में काफी देरी होती थी, जिससे सेशन लेट चल रहे थे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को पूरे सूबे में एक समान लागू करने और एडमिशन प्रोसेस में पारदर्शिता लाने के लिए कुलाधिपति ने यह कदम उठाया है।
राजभवन ने सभी कुलपतियों से इस आदेश पर तुरंत एक्शन लेते हुए ‘अनुपालन रिपोर्ट’ (Compliance Report) मांगी है। इस फैसले के बाद अब बिहार के लाखों छात्रों को पीएचडी में दाखिले के लिए राष्ट्रीय स्तर की नेट (NET) परीक्षा पर ही पूरा फोकस करना होगा।