लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मंत्रियों को विभागों के आवंटन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सियासत को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सत्ता का केंद्र कहां है। राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि इस बार गृह, पीडब्ल्यूडी (PWD), ऊर्जा और सूचना जैसे भारी-भरकम विभागों में फेरबदल हो सकता है। यहां तक कि दल-बदल कर आए एक नए मंत्री के समर्थकों ने तो पीडब्ल्यूडी मुख्यालय के बाहर होर्डिंग्स तक लगवा दिए थे। लेकिन जब अंतिम सूची आई, तो सब धरे के धरे रह गए। मुख्यमंत्री ने किसी की नहीं सुनी और यह साबित कर दिया कि उनका ‘दबदबा’ था, है और रहेगा।
हालांकि, इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि अंततः यही आवंटन होना था, तो इसमें इतना लंबा वक्त क्यों लगा?
जाट बेल्ट और ‘दिल्ली वाले शर्मा जी’ का गणित
चुनाव से ठीक पहले हुए इस विस्तार में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नेतृत्व को उम्मीद है कि वह इस विभाग के दम पर जाट बेल्ट में रालोद के जयंत चौधरी से अधिक लोकप्रिय होकर उभरेंगे।
चर्चाओं का बाजार: मीडिया में कयास थे कि भूपेंद्र सिंह को लोक निर्माण विभाग (PWD) मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जाट वोटों को पूरी तरह साधने की योजना थी, तो उन्हें कृषि या गन्ना विकास विभाग मिलना चाहिए था, जिससे ‘जाट लैंड’ खुद को सीधे जुड़ा हुआ महसूस करता।
इस फैसले को सीधे तौर पर ‘दिल्ली वाले शर्मा जी’ (जो चौधरी साहब के हर छोटे-बड़े आयोजनों में अनिवार्य रूप से मौजूद रहते थे) के सियासी रसूख के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव से ठीक पहले उन पर हुआ हमला, दल-बदल कर भाजपा में आने वाले नेताओं के लिए भी राजनीतिक संकट का संकेत दे रहा है।
पीएम मोदी के क्षेत्र में वोट घटने की गाज, पाल समाज का बढ़ा कद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और उसके आस-पास के समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं:
दयालु महाराज का विभाग घटा: कांग्रेस से भाजपा में आए और पीएम मोदी की सीट पर उन्हें मजबूत करने का जिम्मा संभालने वाले डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ का कद घटा दिया गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी में पीएम मोदी की जीत का अंतर कम होने की गाज दयालु महाराज पर गिरी है। उनसे खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग वापस ले लिया गया है।
अजीत सिंह पाल को कमान: यह विभाग अब स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल को सौंपा गया है, जो कानपुर देहात की सिकंदरा सीट से विधायक हैं। भाजपा संगठन में पाल समाज के सबसे बड़े नेता प्रकाश पाल (क्षेत्रीय अध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड) के बाद अजीत पाल का कद बढ़ने से प्रयागराज से लेकर मैनपुरी तक के पाल वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ मजबूत होगी।
हंसराज विश्वकर्मा बने चौथे मंत्री: वाराणसी के पूर्व महानगर अध्यक्ष और एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को राज्य मंत्री बनाकर MSME विभाग से जोड़ा गया है। गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की लड़की के साथ हुई दुर्घटना के बाद सपा इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश में थी, जिसे भाजपा ने इस नियुक्ति से बेअसर कर दिया है। अब वाराणसी क्षेत्र से वह चौथे मंत्री हैं (अनिल राजभर, रवींद्र जायसवाल और दयाशंकर मिश्र के बाद), जिनका मुख्य काम 2024 में घटे वोटों की भरपाई करना होगा।
मनोज पांडे ‘मजा मां’ और रायबरेली की रार
सपा छोड़कर आए मनोज पांडे इस फेरबदल में सबसे फायदे में दिख रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों के इनाम के तौर पर उन्हें खाद्य रसद विभाग से नवाजा गया है।
इसका सीधा असर रायबरेली की स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा, जहां कांग्रेस से आए दिनेश प्रताप सिंह के मंत्री और एमएलसी बनने से मूल भाजपाई पहले से ही हाशिये पर हैं। विपक्ष से लड़कर पार्टी को सत्ता में लाने वाले मूल कार्यकर्ता अब ‘किम कर्त्तव्य विमूढ़’ (क्या करें, क्या न करें) की स्थिति में हैं, क्योंकि कल तक जिनसे लड़ाई थी, आज वही उनके सिरमौर बन चुके हैं।
पश्चिम यूपी में चंद्रशेखर रावण की काट और दलित-लोध-पाल गठजोड़
पश्चिमी यूपी और सपा के गढ़ में सेंध लगाने के लिए योगी ने बेहद सधे हुए चेहरों को आगे बढ़ाया है:
सुरेंद्र सिंह दिलेर (अलीगढ़/हाथरास): खैर विधानसभा से विधायक सुरेंद्र दिलेर खाटी जनसंघी और भाजपाई परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। उनके दादा किशन लाल दिलेर 4 बार सांसद रहे। पीएचडी होल्डर सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाकर योगी ने चंद्रशेखर रावण के बढ़ते प्रभाव को रोकने और पश्चिमी यूपी के दलित-मुस्लिम समीकरण को ध्वस्त करने का दांव खेला है। 2027 के चुनाव में यह चेहरा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
कैलाश राजपूत (कन्नौज): तिर्वा से चौथी बार के विधायक और पेशे से वकील कैलाश राजपूत को राज्य मंत्री बनाया गया है। मृदुभाषी राजपूत के मंत्री बनने से सपा के गढ़ में ‘पाल और लोध’ का एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी ब्लॉक खड़ा हो गया है। अब सपा के लिए 2027 में आंख बंद करके किसी यादव प्रत्याशी को उतारना आसान नहीं होगा, क्योंकि ऐसा करने पर उनका PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथ चुनाव से पहले ही पंचर हो सकता है।
सोमेंद्र तोमर बनाम अशोक कटारिया: सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री से प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। इससे उनकी आधिकारिक शक्तियां तो बढ़ेंगी, लेकिन जमीनी जनाधार बढ़ाने में संशय है। गुर्जर समाज में गहरी पैठ के लिए पार्टी पूर्व मंत्री अशोक कटारिया को भी शामिल कर सकती थी।
कृष्णा पासवान: संघर्षों से तपकर निकलीं और “जूते में दम तो कहो कलक्टर हम” की नीति पर चलने वालीं दलित पासी समाज की कृष्णा पासवान (4 बार की विधायक) को राज्य मंत्री बनाना भाजपा के सांगठनिक हित में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ का यह नया मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह से मिशन 2027 को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जहां एक तरफ मूल भाजपाइयों की नाराजगी और दल-बदलुओं के दबदबे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी तरफ जातिगत समीकरणों (पासी, पाल, लोध, जाट, विश्वकर्मा और दलित) के जरिए विपक्ष के ‘PDA’ फॉर्मूले की हवा निकालने की पूरी तैयारी कर ली गई है।