पटना (बिहारस्कैन ब्यूरो): आज 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) है। सुबह होते ही आपके मोबाइल पर हरे-भरे पेड़ों की तस्वीरें और पर्यावरण बचाने के लंबे-चौड़े मैसेजेस की बाढ़ आ गई होगी। लेकिन मोबाइल स्क्रीन से नजरें हटाकर जैसे ही आप घर की खिड़की से बाहर देखेंगे, तो झुलसा देने वाली पछुआ हवाएं और आसमान से बरसती आग असलियत बयां कर देगी। इस साल बिहार के कई जिलों में पारा 47-48 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है, और भूजल स्तर (Groundwater Level) पाताल में चला गया है। ऐसे में आज मनाया जा रहा विश्व पर्यावरण दिवस हमारे लिए केवल एक सालाना रस्म नहीं, बल्कि वजूद को बचाने की आखिरी चेतावनी है।

BiharScan की इस विशेष रिपोर्ट में आज हम किताबी दावों से अलग उस कड़वी हकीकत पर बात करेंगे, जिससे हम सब हर दिन जूझ रहे हैं।
इस साल की थीम क्या है और बिहार के लिए इसके क्या मायने हैं?
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में इस साल विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की वैश्विक मेजबानी अज़रबैजान कर रहा है। इस साल की आधिकारिक थीम है:
“Inspired by Nature. For Climate. For Our Future.”
(प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।)
इस थीम का सीधा संदेश है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी जिन बड़ी मुसीबतों से आज इंसान लड़ रहा है, उनका समाधान प्रकृति के पास ही है। बिहार के संदर्भ में देखें तो हमारे तालाबों, आहर-पाइन और पारंपरिक पेड़ों (जैसे पीपल, बरगद, नीम) को नष्ट करके जो कंक्रीट के जंगल खड़े किए गए हैं, यह भीषण गर्मी उसी का नतीजा है। हमें विकास के साथ-साथ प्रकृति को वापस उसका हक देना होगा।
कंक्रीट के जंगल और सूखती नदियां: कहां जा रहे हैं हम?
बिहार में पिछले कुछ सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास हुआ है, सड़कें चौड़ी हुई हैं, लेकिन इसकी भारी कीमत हमारे पर्यावरण ने चुकाई है। हजारों पुराने पेड़ काट दिए गए और उनकी जगह नए पौधे उस तादाद में नहीं पनप पाए। नतीजा यह है कि आज हमारे शहरों में ‘हीट आइलैंड’ बन रहे हैं। गर्मी से बचने के लिए हम घरों में एसी (AC) की संख्या बढ़ा रहे हैं, जो बाहर की हवा को और ज्यादा जहरीला और गर्म बना रही है।
जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्टों पर नजर डालें तो बिहार के कई जिलों में वाटर टेबल खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका है। जून की इस गर्मी में चापाकल सूख रहे हैं और गांवों से लेकर शहरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है।
बिहारस्कैन अपील: क्या हैं वो छोटे बदलाव जो हम आज से कर सकते हैं?
ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए आपको किसी बड़े मंच पर भाषण देने की जरूरत नहीं है, बस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन 4 आदतों को शामिल कर लीजिए:
- पानी की हर बूंद की कीमत समझें: ब्रश करते समय या बर्तन धोते समय नल को खुला न छोड़ें। आरओ (RO) से निकलने वाले वेस्ट पानी को बाल्टी में इकट्ठा करें और उससे पोछा लगाएं या गाड़ियों की धुलाई करें।
- सिंगल-यूज प्लास्टिक को कहें ‘बाय-बाय’: बाजार जाते समय घर से कपड़े या जूट का थैला साथ ले जाने की आदत डालें। प्लास्टिक हमारी मिट्टी और नदियों को मार रहा है।
- दिखावे के लिए नहीं, जिम्मेदारी से पौधे लगाएं: आज फोटो खिंचवाने के लिए कोई भी पौधा न लगाएं। अगर पौधा लगा रहे हैं, तो अगले 3 साल तक उसकी बच्चे की तरह देखभाल करने का संकल्प लें, ताकि वह एक पेड़ बन सके।
- पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण: अपने आस-पास के तालाबों और कुओं को कचराघर बनने से रोकें।
वक्त आ गया है कि हम ‘सिटिजन’ से ‘इको-सिटिजन’ बनें
प्रकृति हमारे बिना करोड़ों साल से फल-फूल रही थी और हमारे बाद भी रहेगी। खतरा प्रकृति को नहीं, बल्कि खुद हमारी मानव सभ्यता और हमारी आने वाली पीढ़ियों को है। अगर हम आज नहीं संभले, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो जाएगी। इस विश्व पर्यावरण दिवस पर आइए सिर्फ सोशल मीडिया पर एक्टिव होने के बजाय जमीन पर कुछ काम करने का संकल्प लें। क्योंकि जब धरती बचेगी, तभी तो हमारा बिहार बचेगा!
बहुत ही अच्छा विचार । ऐसे ही लोगों को मार्गदर्शित करते रहे ।
धन्यवाद ।
सराहना के लिए धन्यवाद! बिहारस्कैन ऐसे ही समाज को जागरूक करता रहेगा।
Please Support sustainable agriculture 👍
सराहना के लिए धन्यवाद! बिहारस्कैन ऐसे ही समाज को जागरूक करता रहेगा।
GREAT OBSERVATION ! Brilliant Article
सराहना के लिए धन्यवाद! बिहारस्कैन ऐसे ही समाज को जागरूक करता रहेगा।