समस्तीपुर में खाद्य मिलावट की जांच सुस्त, 43 में से 39 नमूनों की रिपोर्ट लंबित; कर्मचारियों की कमी बनी बड़ी वजह

समस्तीपुर। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश लगाने की सरकारी व्यवस्था संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले तीन महीनों में जांच के लिए भेजे गए 43 नमूनों में से महज चार की रिपोर्ट ही प्राप्त हुई है। शेष 39 नमूनों की जांच रिपोर्ट अब तक लंबित है। रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी के कारण संदिग्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की पुष्टि और मिलावट करने वाले कारोबारियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई प्रभावित हो रही है।

नियमानुसार खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर उपलब्ध होनी चाहिए। इसके बावजूद कई मामलों में रिपोर्ट आने में महीनों लग रहे हैं। विभाग की टीम बाजारों और दुकानों से नमूने एकत्र कर उन्हें जांच के लिए पटना स्थित प्रयोगशाला भेजती है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिलने के बाद ही खाद्य पदार्थों में मिलावट या गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन की पुष्टि हो पाती है। ऐसे में जांच प्रक्रिया में देरी होने से विभाग की कार्रवाई भी आगे नहीं बढ़ पाती है।

अक्टूबर में भेजे गए 23 नमूनों की रिपोर्ट भी नहीं आई

खाद्य सुरक्षा विभाग ने अक्टूबर महीने में विभिन्न खाद्य पदार्थों के 23 नमूने जांच के लिए पटना प्रयोगशाला भेजे हैं। इनकी रिपोर्ट का अभी इंतजार किया जा रहा है। पहले से लंबित नमूनों की संख्या के बीच नए नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से विभाग की निगरानी व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

विभाग के सामने कर्मचारियों की कमी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर रामा स्वामी वेंकेंट रमन शर्मा को समस्तीपुर के साथ दरभंगा और मधुबनी जिले का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। तीन जिलों की जिम्मेदारी संभालने के कारण नियमित निरीक्षण, खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करने और मिलावट के खिलाफ अभियान चलाने में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।

जिले में दो हजार से अधिक मिठाई दुकानें, चार दर्जन से ज्यादा उत्पादन इकाइयां

समस्तीपुर में खाद्य कारोबार का बड़ा नेटवर्क है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में लगभग दो हजार छोटी-बड़ी मिठाई की दुकानें संचालित हैं। इसके अलावा चार दर्जन से अधिक ऐसी फैक्ट्रियां हैं, जहां कच्चे माल से मिठाइयों का उत्पादन किया जाता है।

त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में मिठाइयों तथा अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावट की आशंका को देखते हुए निगरानी और जांच अभियान की जरूरत और अधिक बढ़ जाती है। मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले दूध, खोआ, घी, तेल, कृत्रिम रंग और अन्य कच्चे पदार्थों की गुणवत्ता उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए दुकानों और उत्पादन इकाइयों का नियमित निरीक्षण तथा संदिग्ध खाद्य पदार्थों की समय पर जांच आवश्यक है।

प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर ही होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत किसी खाद्य पदार्थ का नमूना संग्रह कर लेना अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं माना जाता। प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होता है कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप है या उसमें मिलावट अथवा गुणवत्ता संबंधी कमी पाई गई है।

यदि जांच में नमूना असुरक्षित या निर्धारित मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। फिलहाल 43 नमूनों में से 39 की रिपोर्ट लंबित होने के कारण विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

ऐसे में जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता, नियमित जांच अभियान और प्रयोगशाला से समय पर रिपोर्ट प्राप्त होना बेहद जरूरी है।

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