समस्तीपुर मंडल कारा में हड़कंप: कोर्ट में पेशी से पहले ही उजड़ गया परिवार, परिजनों का आरोप- ‘पुलिस की पिटाई ने ले ली सुधीर की जान’

पूरी खबर: क्या है पूरा मामला?

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। समस्तीपुर मंडल कारा (जेल) में बंद एक विचाराधीन कैदी की सोमवार की देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान हलई थाना इलाके के बाजितपुर करनौल (वार्ड 1) के रहने वाले 30 वर्षीय सुधीर महतो उर्फ बाबा के रूप में हुई है। जवान बेटे की मौत की खबर जैसे ही घर पहुँची, परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

शराब तस्करी के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

मामला महज तीन दिन पुराना है। जानकारी के मुताबिक, बीते 31 मई को उत्पाद थाना पटोरी की पुलिस ने सुधीर महतो को शराब तस्करी के आरोप में दबोचा था। गिरफ्तारी के बाद कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी कर उसे न्यायिक हिरासत में समस्तीपुर मंडल कारा भेज दिया गया था। लेकिन किसे पता था कि जेल जाने के महज 48 घंटे के भीतर सुधीर की लाश बाहर आएगी।

जेल प्रशासन की सफाई: ‘शराब का आदी था युवक’

इस पूरे मामले पर जब समस्तीपुर मंडल कारा प्रशासन की तरफ से सफाई मांगी गई, तो मंडल काराधीक्षक प्रशांत ओझा ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा:

“31 मई को जब सुधीर महतो को समस्तीपुर मंडल कारा लाया गया था, तभी से उसकी तबीयत नासाज थी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि वह बहुत ज्यादा शराब पीने का आदी था (Alcohol Withdrawal Issues)। सदर अस्पताल में शुरुआती इलाज कराने के बाद उसे जेल के अंदर बने अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, जहाँ डॉक्टर लगातार उसकी देखरेख कर रहे थे। सोमवार की शाम अचानक उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद आनन-फानन में उसे फिर से सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ देर रात उसने दम तोड़ दिया।”

परिजनों का सीधा आरोप: ‘पुलिस की पिटाई से गई जान’

दूसरी तरफ, जेल प्रशासन के इन दावों को मृतक के परिवार ने सिरे से खारिज कर दिया है। सुधीर के घरवालों का सीधा और गंभीर आरोप है कि यह बीमारी से हुई मौत नहीं, बल्कि सीधे-सीधे ‘हिरासत में हत्या’ का मामला है। परिजनों ने रोते हुए बताया कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने सुधीर के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। अंदरूनी चोटों और पुलिस की बर्बरता के कारण ही सुधीर की जान गई है।

मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम, मेडिकल टीम गठित

मामले की गंभीरता और इलाके में तनाव को देखते हुए प्रशासन तुरंत बैकफुट पर आया है। मामले में पारदर्शिता बरतने के लिए शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान विशेष सुरक्षा और सावधानी बरती जा रही है।

  • शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की एक विशेष मेडिकल टीम कर रही है।
  • पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जा रही है।
  • सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मौके पर एक दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की तैनाती की गई है।

अब देखना यह होगा कि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट में मौत की असली वजह क्या निकलकर सामने आती है—पुलिस की कथित पिटाई या फिर बीमारी? लेकिन इस घटना ने एक बार फिर बिहार में पुलिसिया कार्रवाई और समस्तीपुर मंडल कारा के भीतर कैदियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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