शुभेंदु सरकार का नया घुसपैठ विरोधी एक्शन प्लान; मालदा में पहला होल्डिंग सेंटर शुरू, 9 बांग्लादेशी हिरासत में
कोलकाता/मालदा: पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में नवगठित भाजपा सरकार ने अपने सबसे बड़े चुनावी वादों में से एक (बंगाल में घुसपैठ विरोधी अभियान) पर जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के लिए ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ (Detect, Delete and Deport) नीति को आधिकारिक तौर पर जमीन पर उतार दिया है।
इस नीति के तहत राज्य का पहला ‘होल्डिंग सेंटर’ (Holding Centre) मालदा जिले में चालू हो गया है, जहां अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में दाखिल होने वाले 9 बांग्लादेशी नागरिकों को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। सरकार के इस कदम से सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है, वहीं राजनीतिक तापमान भी चरम पर पहुंच गया है।
मालदा में पहला होल्डिंग सेंटर शुरू: 9 बांग्लादेशी हिरासत में
राज्य के गृह विभाग के निर्देश के ठीक 48 घंटे के भीतर मालदा जिला प्रशासन ने इंग्लिश बाजार के ‘चंदन पार्क’ इलाके में स्थित एक सरकारी इमारत में इस होल्डिंग सेंटर को सक्रिय कर दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गाजोल थाना क्षेत्र के पांडुआ इलाके से हिरासत में लिए गए 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रविवार रात इस सेंटर में शिफ्ट किया गया। हिरासत में लिए गए इन लोगों में:
- 3 महिलाएं
- 6 नाबालिग बच्चे शामिल हैं।
सुरक्षा के लिहाज से इस सेंटर को किले में तब्दील कर दिया गया है। यहाँ चौबीसों घंटे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। साथ ही, 12 सशस्त्र पुलिसकर्मियों, सिविल डिफेंस के जवानों और सिविक वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों के भोजन और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हुए कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। मालदा के अलावा मुर्शिदाबाद के लालगोला स्थित ‘पद्मा भवन’ में भी ऐसा ही एक केंद्र शुरू कर दिया गया है, जहां जाली दस्तावेजों के साथ पकड़े गए 3 लोगों को रखा गया है।
‘जलती-जल्दी भागो, नहीं तो…’ : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की दोटूक
इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नादिया, हुगली और उत्तर 24 परगना जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कल्याणी में एक हाई-लेवल मीटिंग की। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया।
उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के जुटने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा:
“जल्दी-जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी। हम इन्हें जेलों में रखकर सरकारी पैसा और मुफ्त का राशन बर्बाद नहीं करना चाहते। यह हमारे अपने नागरिकों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों के अधिकारों का हनन है। पुरानी सरकारों ने वोट बैंक के चक्कर में कानूनों को ठंडे बस्ते में डाल रखा था, लेकिन हम वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर देश और राज्य की सुरक्षा के लिए इस नीति को पूरी सख्ती से लागू करेंगे।”
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते हैं और अवैध रूप से यहां रह रहे हैं, उन्हें ‘घुसपैठिया’ माना जाएगा और राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप देगी ताकि उनका तत्काल डिपोर्टेशन (देश निकाला) किया जा सके।
जानिए क्या है शुभेंदु सरकार का ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ एक्शन प्लान?
पश्चिम बंगाल में घुसपैठ विरोधी नीति के तहत सरकार ने एक त्रिस्तरीय (Three-Tier) चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसके तहत प्रशासनिक और तकनीकी मोर्चे पर एक साथ काम किया जा रहा है:
1. डिटेक्ट (Detect – पहचान करना)
राज्य पुलिस के हेड कांस्टेबल और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को बिना वारंट के संदिग्ध विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेने का अधिकार दिया गया है। हाल ही में संसद द्वारा पारित इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और डिजिटल बनाया गया है। खुफिया इनपुट और स्थानीय स्तर पर वेरिफिकेशन के जरिए घुसपैठियों की पहचान की जा रही है।
2. डिलीट (Delete – नाम हटाना)
पहचान होने के बाद संदिग्धों के बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन) लिए जा रहे हैं। शुभेंदु सरकार का दावा है कि राज्य में करीब 90 लाख ‘फर्जी मतदाता’ हैं जो जाली वोटर आईडी, राशन कार्ड या आधार कार्ड के सहारे यहां रह रहे हैं। केंद्रीय डेटाबेस से मिलान कर इन फर्जी दस्तावेजों को तुरंत ब्लॉक किया जा रहा है और मतदाता सूची से इनके नाम ‘डिलीट’ किए जा रहे हैं।
3. डिपोर्ट (Deport – वापस भेजना)
पकड़े गए लोगों को अदालती प्रक्रियाओं के लंबे फेर में फंसाने के बजाय सीधे जिला स्तर के होल्डिंग सेंटर्स में 30 दिनों के लिए रखा जाएगा। इस दौरान डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) स्तर के अधिकारी उनकी राष्ट्रीयता की अंतिम पुष्टि करेंगे। इसके बाद राज्य पुलिस उन्हें सीधे BSF को सौंप देगी, जो बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के साथ फ्लैग मीटिंग कर उन्हें सीधे ‘पुशबैक’ या डिपोर्ट कर देगी।
सीमा पर बढ़ी हलचल, वापस भागने की होड़
सरकार के इस ‘बुलडोजर एक्शन’ और सख्त बयानों का असर जमीन पर दिखने लगा है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से रह रहे कई परिवार अब कानूनी कार्रवाई और डिटेंशन के डर से खुद ही वापस बांग्लादेश की सीमा की तरफ रुख करने लगे हैं। सीमा चौकियों के पास संदिग्ध लोगों की गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिन्हें देखते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
राजनीतिक घमासान: बीजेपी ने बताया सुरक्षा कवच, टीएमसी ने किया हैरान करने वाला समर्थन
शुभेंदु सरकार के इस कदम पर राज्य में सियासत पूरी तरह गरमा गई है। उत्तर मालदा से भाजपा सांसद खगेन मुर्मू ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “हमारा राज्य रोहिंग्याओं, तस्करों और असामाजिक तत्वों के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका था। बंगाल और देश की सुरक्षा के लिए यह कदम बहुत जरूरी था।”
दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर विपक्ष में बैठी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का रुख बेहद नपा-तुला नजर आ रहा है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने एक बयान में कहा, “अगर सरकार के पास पुख्ता खुफिया इनपुट हैं और वह अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को पकड़ रही है, तो हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। हम देश की सुरक्षा से जुड़े इस कदम का समर्थन करते हैं।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी अब खुद पर ‘तुष्टिकरण’ का टैग लगने से बचाना चाहती है, इसलिए वह इस मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
निष्कर्ष: क्या बदल जाएगी बंगाल की डेमोग्राफी?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हाल ही में देश में अवैध घुसपैठ के कारण हो रहे ‘अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव’ (Demographic Change) की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का ऐलान किया है। ऐसे में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार का यह साझा रुख साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने वाला है। मालदा और मुर्शिदाबाद के बाद अब बीरभूम, नादिया और अन्य सीमावर्ती जिलों में भी होल्डिंग सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है। साफ है कि शुभेंदु सरकार ने यह जता दिया है कि बंगाल में अब घुसपैठ के मुद्दे पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति ही चलेगी।