भारतीय भाषा समर कैंप का भव्य समापन, बच्चों की प्रतिभा ने जीता दिल
भारतीय भाषा समर कैंप 2026: समस्तीपुर जिले के मध्य विद्यालय (एमएस) बजितपुर करनैल में आयोजित सात दिवसीय भारतीय भाषा समर कैंप (BBSC-2026) का उत्साहपूर्ण माहौल में समापन हुआ। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित इस कैंप का उद्देश्य बच्चों में भाषाई कौशल, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
पूरे सप्ताह विद्यालय परिसर बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा। छात्र-छात्राओं ने अभिनय, रोल प्ले, संवाद अभ्यास, शब्दावली निर्माण और फ्लैश कार्ड जैसी आधुनिक एवं खेल-आधारित गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गीत, नृत्य और नुक्कड़ नाटक से बच्चों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग
समर कैंप के दौरान बच्चों ने सिर्फ भाषा सीखने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि गीत-संगीत, पारंपरिक नृत्य, चित्रकला, कठपुतली शो और नुक्कड़ नाटक के जरिए अपनी छिपी हुई प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। समापन समारोह में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बच्चों ने विभिन्न भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों की झलक पेश करते हुए मंच से “एक भारत श्रेष्ठ भारत” का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों की भी अच्छी भागीदारी रही।

बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से कराया गया परिचित
कैंप की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को सिर्फ पाठ्यक्रम आधारित जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें भारत की विविध संस्कृतियों और परंपराओं से भी जोड़ा गया।
ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए बच्चों को भारत के गौरवशाली इतिहास, प्रमुख नदियों, पर्वतों और ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी दी गई। साथ ही स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक मसाले, फल और सब्जियों के महत्व से भी परिचित कराया गया।

शिक्षकों और विद्यालय परिवार की रही अहम भूमिका
इस पूरे सात दिवसीय कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की शिक्षिका ज्योति श्वेता ने किया। वहीं, प्रधानाध्यापक महेश चंद्र ठाकुर समेत विद्यालय के सभी शिक्षकों और कर्मियों ने कैंप को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि ऐसे समर कैंप बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी हैं और भविष्य में भी इस तरह के प्रयास जारी रहेंगे।
विद्यालय परिवार, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग की इस पहल की सराहना की और इसे बच्चों के लिए प्रेरणादायक बताया।