इंसानियत जिंदा है: बिहार में ऑटो वाले ने लौटाई 70 हजार की नकदी और कीमती सामान से भरी अटैची, इनाम लेने से भी किया इनकार

पटना:

आज के दौर में जहां लोग छोटी-सी लालच के चक्कर में अपनी इंसानियत और ईमान तक बेच देते हैं, वहीं बिहार की धरती से एक ऐसी दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है जो आपका दिल जीत लेगी। मनेर के एक साधारण ऑटो चालक ने साबित कर दिया है कि दौलत से बड़ी इंसानियत और ईमानदारी होती है। इस ऑटो वाले की नेकदिली की चर्चा अब हर तरफ हो रही है।

क्या है पूरी घटना?

मामला मनेर थाना क्षेत्र के खासपुर पंचायत का है। यहां रहने वाले विनोद कुमार तिवारी (जिन्हें प्यार से लोग पंडित जी भी कहते हैं) दानापुर से पटना जंक्शन के बीच ऑटो चलाते हैं। शनिवार की रात जब वे सवारी छोड़ रहे थे, तब पटना जीपीओ के पास उन्हें सड़क पर एक गिरा हुआ बैग मिला।

विनोद ने तुरंत बैग उठाया और यात्रियों को ढूंढने के लिए आवाज लगाई। उन्होंने अपनी ऑटो से ई-रिक्शा का पीछा भी किया, लेकिन रास्ते के भारी ट्रैफिक जाम की वजह से वे उन तक नहीं पहुंच सके।

बैग में थे 20 हजार नकद और महंगे फोन

जब विनोद कुमार तिवारी ने घर जाकर उस बैग को खोला, तो उसमें रखी चीजें देखकर कोई भी चकरा सकता था। उस बैग के अंदर:

  • 20,000 रुपये नकद

  • दो महंगे स्मार्टफोन

  • लगभग 50,000 रुपये मूल्य के अन्य कीमती सामान मौजूद थे।

इतनी बड़ी रकम और सामान देखकर किसी का भी ईमान डगमगा सकता था, लेकिन विनोद का दिल पूरी तरह साफ था। उनके मन में लालच आने के बजाय बस एक ही बात थी कि यह सामान किसी जरूरतमंद का है और उसे हर हाल में वापस मिलना चाहिए।

फोन कॉल के जरिए ढूंढा असली मालिक

विनोद ने हार नहीं मानी। बैग में रखे दोनों मोबाइल फोन पर लगातार कॉल्स आ रहे थे। उन्होंने उन नंबरों पर बात की और सही सलामत मालिक से संपर्क साध लिया। जांच-पड़ताल में पता चला कि यह बैग झारखंड में कृषि निरीक्षक के पद पर कार्यरत और सारण जिले के मेहंदी गांव के रहने वाले विनोद कुमार गुप्ता का है।

रविवार को स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि की मौजूदगी में जब पूरा सामान और नकदी सही सलामत असली मालिक के हाथ में सौंपी गई, तो उनके चेहरे की खुशी देखने लायक थी।

इनाम लेने से साफ इनकार

अपना खोया हुआ कीमती सामान और नकदी वापस पाकर गदगद हुए अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता ने ऑटो चालक को बतौर इनाम कुछ पैसे देने चाहे। लेकिन, विनोद कुमार तिवारी ने यह कहते हुए इनाम लेने से पूरी तरह मना कर दिया कि “किसी का खोया हुआ सामान उसके हक तक पहुंचाना मेरा फर्ज था, इसके लिए इनाम कैसा।”

एक साधारण ऑटो चालक की इस ईमानदारी ने यह बता दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। इलाके के लोग उनकी इस दरियादिली और सच्चाई को सलाम कर रहे हैं।

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