बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में ओवरलोड वाहनों पर नकेल कसने और टोल व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। जिले के तीन महत्वपूर्ण पुलों—रघई घाट, बंगरा घाट और पिलखी पुल पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) के साथ अत्याधुनिक वजन जांच प्रणाली लगाई जाएगी। इस हाईटेक प्रोजेक्ट पर लगभग 5.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्य बिंदु:
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मुजफ्फरपुर के रघई घाट, बंगरा घाट और पिलखी पुल पर लगेगा इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम।
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लगभग 5.18 करोड़ रुपये की लागत से ओवरलोड वाहनों पर रखी जाएगी पैनी नजर।
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गाड़ियों को बिना रोके उनका वजन मापने वाली ‘वेट-इन-मोशन’ तकनीक का होगा इस्तेमाल।
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नवंबर के पहले सप्ताह तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी होने की संभावना।
मुजफ्फरपुर: बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने मुजफ्फरपुर जिले की सड़कों और पुलों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अक्सर क्षमता से अधिक भार लेकर गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण पुलों की संरचना को नुकसान पहुंचता है और उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए अब रघई घाट, बंगरा घाट और पिलखी पुल पर इलेक्ट्रॉनिक टोल और अत्याधुनिक वजन जांच प्रणाली स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
नवंबर में मिलेगा वर्क ऑर्डर, निजी एजेंसी संभालेगी कमान
विभागीय जानकारी के मुताबिक, इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 5.18 करोड़ रुपये है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि नवंबर के पहले सप्ताह के अंत तक चयनित एजेंसी को इसका कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) सौंप दिया जाएगा।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम इस व्यवस्था के संचालन के लिए किसी निजी एजेंसी के साथ 3 साल और 2 महीने का करार करेगा। यह एजेंसी उपकरणों की आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और अगले तीन सालों तक इनके रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी।
चलती गाड़ियों का वजन नापेगी हाईटेक तकनीक
इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली ‘मीडियम स्पीड वेट-इन-मोशन’ (MSWIM) और ‘स्टैटिक वेट ब्रिज’ (SWB) तकनीक है। इस तकनीक के जरिए वाहनों को टोल या जांच के लिए लंबा इंतजार करने या रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गाड़ियां चलते-चलते ही अपना वजन दर्ज करा लेंगी।
यदि किसी वाहन पर ओवरलोडिंग का संदेह होता है, तो उसे ‘स्टैटिक वेट ब्रिज’ पर रोककर सटीक जांच की जाएगी। इस पारदर्शी प्रणाली से एक तरफ जहां अवैध ओवरलोडिंग पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी तरफ सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
पुलों की उम्र और सुरक्षा होगी मजबूत
प्रशासन का मानना है कि क्षमता से अधिक वजन ढोने वाले ट्रक और अन्य वाहन पुलों की लाइफ को कम कर देते हैं। इस हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम के एक्टिव होने के बाद ओवरलोडिंग करने वाले ट्रांसपोर्टर्स और वाहन चालकों पर तुरंत शिकंजा कसा जा सकेगा, जिससे हमारे पुल लंबे समय तक सुरक्षित और दुरुस्त बने रहेंगे।