समस्तीपुर/बिहार स्कैन
बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के विभूतिपुर थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए अधिवक्ता रंजीत कुमार ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस पर झूठे मुकदमों में फंसाने और निष्पक्ष जांच न करने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता सोमवार से प्रखंड मुख्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के बाद इलाके के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा विवाद और गंभीर आरोप?
अधिवक्ता रंजीत कुमार ने विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा पर व्यक्तिगत रंजिश के तहत फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराने की मांग की है।
अधिवक्ता के मुताबिक, रोसड़ा व्यवहार न्यायालय में दाखिल एक परिवाद पर इसी साल 6 फरवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया था। आरोप है कि इसके बाद थानाध्यक्ष ने रंजिश रखते हुए उनके और मामले से जुड़े एक मुख्य गवाह के खिलाफ मनगढ़ंत कहानी रचकर मुकदमा दर्ज कर लिया।
साक्ष्य देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अधिवक्ता का दावा है कि पुलिस ने जिस घटना को आधार बनाकर एफआईआर दर्ज की है, उस वक्त मुख्य गवाह बिहार में नहीं बल्कि नेपाल में एक शादी समारोह में मौजूद थे। अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें और ठोस सबूत वरीय पुलिस अधिकारियों के सामने रखे थे। हालांकि, तमाम दस्तावेज और सबूत सौंपने के बावजूद पुलिस महकमे की तरफ से कोई ठोस या अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
पटना हाईकोर्ट पहुंचा मामला
न्याय की आस में अधिवक्ता ने अब पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहाँ इस मामले में रिट याचिका दाखिल की गई है। अदालत ने इस मामले में आगामी 29 अक्टूबर 2026 को उपस्थिति का निर्देश दिया है। अनशन पर बैठे अधिवक्ता का साफ कहना है कि वे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि पुलिसिया मनमानी के खिलाफ और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं जब तक इंसाफ नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस का पक्ष: सभी आरोप बेबुनियाद
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जब विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा से बात की गई, तो उन्होंने अधिवक्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। थानाध्यक्ष का कहना है कि पुलिस ने पूरी तरह नियमानुसार और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की है। किसी को भी निजी रंजिश के तहत फंसाने के आरोप पूरी तरह निराधार और सत्य से परे हैं।